5G

पांचवीं पीढ़ी के मोबाइल संचार

1.अनुसंधान महत्वमोबाइल संचार का विकास कई पीढ़ियों के माध्यम से चला गया है। पहली पीढ़ी के एनालॉग मोबाइल संचार (एनालॉग सेलुलर) से, जो तीसरी पीढ़ी के मोबाइल मल्टीमीडिया संचार (3 जी) के लिए दूसरी पीढ़ी के डिजिटल मोबाइल संचार (डिजिटल सेलुलर) को केवल वॉयस सेवाएं प्रदान कर सकता है। जब 3 जी लोकप्रिय हो गया है, चौथी पीढ़ी के मोबाइल संचार (4 जी) पहले ही आ चुके हैं। बढ़ते डेटा यातायात और स्मार्ट टर्मिनलों की लोकप्रियता ने 4 जी को क्षमता, गति और स्पेक्ट्रम के संदर्भ में नेटवर्क के लिए लोगों की मांगों को पूरा नहीं किया है। इसके आधार पर, पांचवीं पीढ़ी के मोबाइल संचार नेटवर्क (5 जी) उभरा है। 5 जी 2020 के बाद मोबाइल संचार की जरूरतों के लिए विकसित मोबाइल संचार प्रणालियों की एक नई पीढ़ी है। मोबाइल संचार के विकास कानून के अनुसार, 5 जी में अति उच्च स्पेक्ट्रम दक्षता और ऊर्जा दक्षता होगी। ट्रांसमिशन दर और संसाधन उपयोग के संदर्भ में यह 4 जी मोबाइल संचार से परिमाण या अधिक से अधिक होगा, और इसके वायरलेस कवरेज प्रदर्शन, ट्रांसमिशन देरी, और सिस्टम सुरक्षा और उपयोगकर्ता अनुभव में भी काफी सुधार होगा। 5 जी मोबाइल संचार अगले वायरलेस वर्षों में 1,000 गुना अधिक मोबाइल इंटरनेट यातायात की विकास आवश्यकताओं को पूरा करते हुए, सर्वव्यापी मोबाइल सूचना नेटवर्क की एक नई पीढ़ी बनाने के लिए अन्य वायरलेस मोबाइल संचार प्रौद्योगिकियों के साथ निकटता से एकीकृत किया जाएगा। इसलिए, हमें 5 जी प्रौद्योगिकी विकास और सिस्टम डिजाइन दिशा के लिए 5 जी व्यवसाय और प्रमुख तकनीकी संकेतकों को स्पष्ट करने के लिए अनुसंधान करने की आवश्यकता है

2. घर और विदेश में विकास रुझान 5 जी घर और विदेशों में मोबाइल संचार के क्षेत्र में एक शोध हॉटस्पॉट बन गया है। 2013 की शुरुआत में, यूरोपीय संघ ने 7 वीं फ्रेमवर्क योजना में 5 जी आर एंड डी के लिए मेट्रिस (2020 सूचना समाज के लिए मोबाइल और वायरलेस संचार इंजीनियरों) प्रोजेक्ट लॉन्च किया, जिसे संयुक्त रूप से चीन के हुवेई निगम समेत 2 9 प्रतिभागियों द्वारा शुरू किया गया था; क्रमशः कोरिया और चीन में 5 जी प्रौद्योगिकी की स्थापना की गई। फोरम और आईएमटी -2020 (5 जी) प्रमोशन टीम, चीन के 863 कार्यक्रम ने क्रमशः जून 2013 और मार्च 2014 में 5 जी प्रमुख परियोजना आर एंड डी के पहले और दूसरे चरण की शुरुआत की। वर्तमान में, दुनिया भर के देश विकास दृष्टि, आवेदन आवश्यकताओं, उम्मीदवार आवृत्ति बैंड, प्रमुख तकनीकी संकेतक, और 5 जी की प्रौद्योगिकियों को सक्षम करने पर व्यापक चर्चा कर रहे हैं, और 2015 विश्व रेडियो सम्मेलन से पहले और बाद में सर्वसम्मति तक पहुंचने का प्रयास करते हैं, और शुरू करते हैं 2016 के बाद मानकीकरण प्रक्रिया

पिछले 15 वर्षों में, चीन ने 3 जी और 4 जी मोबाइल संचार के लिए 863 प्रमुख शोध परियोजनाओं को सफलतापूर्वक शुरू किया है, और राष्ट्रीय मध्य और दीर्घकालिक विकास योजना के कार्यान्वयन को बढ़ावा दिया है, “ब्रॉडबैंड वायरलेस मोबाइल संचार नेटवर्क की एक नई पीढ़ी” प्रमुख विशेष परियोजनाएं, जिन्होंने चीन की मोबाइल संचार प्रौद्योगिकी को काफी बढ़ावा दिया। स्तर के सुधार ने आर एंड डी और चीन की मोबाइल संचार प्रौद्योगिकी के औद्योगिकीकरण को हासिल किया है।लीपिंग विकास। वितरित वायरलेस नेटवर्किंग के बुनियादी सिद्धांतों में महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय प्रभावों के साथ शोध परिणामों की एक श्रृंखला बनाई गई है। चीन द्वारा वकालत की गई टीडी प्रौद्योगिकी को अंतरराष्ट्रीय मानक के रूप में चुना गया है, और हूवेई, जेडटीई और अन्य कंपनियों के वैश्विक मोबाइल संचार बाजार हिस्सेदारी विश्व स्तर पर पहुंच गई है। सबसे आगे, मोबाइल संचार उद्योग अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धात्मकता के साथ घरेलू उच्च तकनीक उद्योगों में से एक बन गया है5 जी मोबाइल संचार का विकास वैश्विक मोबाइल संचार क्षेत्र में तकनीकी प्रतिस्पर्धा के एक नए दौर की शुरुआत है। यह चीन की सूचना प्रौद्योगिकी और उद्योग के भविष्य के विकास के लिए जल्द से जल्द एक खुला आर एंड डी पर्यावरण तैयार करने और निर्माण करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण कार्यों में से एक है और भविष्य में 5 जी प्रौद्योगिकी और वाणिज्यिक प्रतिस्पर्धा में अग्रणी बढ़त हासिल करने का प्रयास करता है। 2013 के आरंभ में, सरकारी विभागों के मजबूत समर्थन के तहत, 5 जी मोबाइल संचार के अनुसंधान और विकास के लिए आईएमटी -2020 प्रमोशन टीम की स्थापना 5 जी विकास दृष्टि, व्यापार, स्पेक्ट्रम और प्रौद्योगिकी आवश्यकताओं को स्पष्ट करने और 5 जी मुख्य प्रौद्योगिकी का अध्ययन करने के लिए की गई थी। विकास दिशा और प्रौद्योगिकियों को सक्षम करना। एक 5 जी मोबाइल संचार प्रौद्योगिकी ढांचा तैयार करें, अंतर्राष्ट्रीय 5 जी विकास प्रक्रिया में सक्रिय रूप से एकीकृत करने के लिए उत्पादन, शिक्षा और अनुसंधान की ताकतों का समन्वय करें, और 2015 के बाद 5 जी मोबाइल संचार प्रौद्योगिकी मानकीकरण में पूर्ण भागीदारी के लिए एक ठोस तकनीकी नींव रखो। एलटीई का औद्योगिकीकरण, “ब्रॉडबैंड वायरलेस मोबाइल संचार की नई पीढ़ी” प्रमुख परियोजना ने एलटीई के बाद के विकास और नई वायरलेस प्रौद्योगिकियों के शोध को पूरा किया है, जो 5 जी अंतर्राष्ट्रीय मानकीकरण के लिए उम्मीदवार प्रौद्योगिकियों में अधिक स्वतंत्र बौद्धिक संपदा अधिकार उत्पन्न करने का प्रयास कर रहा है। 5 जी के लेआउट के लिए प्रमुख प्रौद्योगिकियों पर शोध शुरू हुआ। राष्ट्रीय 973 योजना ने मोबाइल नेटवर्क सिस्टम नवाचार के लिए शोध विषयों को भी तैनात कियाजून 2013 में, राष्ट्रीय 863 कार्यक्रम ने 5 जी मोबाइल संचार प्रणालियों के लिए एक प्रमुख शोध परियोजना के पहले चरण की शुरुआत की। इसके समग्र लक्ष्य हैं: 2020 में मोबाइल संचार अनुप्रयोगों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए, 5 जी नेटवर्क सिस्टम आर्किटेक्चर, वायरलेस नेटवर्किंग, वायरलेस ट्रांसमिशन और नए एंटेना का अध्ययन करने के लिए। रेडियो फ्रीक्वेंसी और नए स्पेक्ट्रम विकास और उपयोग, पूर्ण प्रदर्शन मूल्यांकन और प्रोटोटाइप सिस्टम डिज़ाइन जैसी प्रमुख प्रौद्योगिकियों के साथ, वायरलेस ट्रांसमिशन प्रौद्योगिकी परीक्षण करते हैं, 10 जीबीपीएस तक कुल सेवा दर का समर्थन करते हैं, और वायु इंटरफ़ेस स्पेक्ट्रम दक्षता और पावर दक्षता को 10 गुना अधिक बढ़ाते हैं 4 जीमुख्य शोध कार्यों में शामिल हैं: 5 जी वायरलेस नेटवर्क आर्किटेक्चर और कुंजी प्रौद्योगिकी अनुसंधान और विकास, 5 जी वायरलेस ट्रांसमिशन कुंजी प्रौद्योगिकी अनुसंधान और विकास, 5 जी मोबाइल संचार प्रणाली समग्र प्रौद्योगिकी अनुसंधान और 5 जी मोबाइल संचार प्रौद्योगिकी मूल्यांकन और परीक्षण सत्यापन प्रौद्योगिकी अनुसंधान। मुख्य तकनीकी मार्गों को अपनाया जाना शामिल है: उच्च घनत्व, उच्च-थ्रूपुट, अल्ट्रा-सेलुलर वायरलेस नेटवर्क प्रौद्योगिकियों में प्रमुख सफलताएं, बड़े पैमाने पर सहकारी एंटेना जैसे अल्ट्रा-हाई-रेट, अल्ट्रा-उच्च-प्रदर्शन वायरलेस पर आधारित प्रमुख तकनीकें ट्रांसमिशन टेक्नोलॉजीज, और नई रेडियो फ्रीक्वेंसी टेक्नोलॉजीज जैसे कि नेटवर्क सहयोग और हस्तक्षेप रद्दीकरण के मुख्य मुद्दे जैसे कि पिकोसेल क्षेत्र में प्रति इकाई क्षेत्र में सिस्टम क्षमता क्षमता लगभग 25 गुना बढ़ जाती है; उच्च-आयामी एंटीना उच्च-आयामी चैनल मॉडलिंग और अनुमान और जटिलता नियंत्रण जैसे प्रमुख मुद्दों के माध्यम से तोड़ें, और वायरलेस ट्रांसमिशन प्रौद्योगिकी प्रयोगों और वायरलेस को पूरा करें ट्रांसमिशन स्पेक्ट्रम दक्षता और शक्ति दक्षता परिमाण के क्रम से बढ़ी है। वायरलेस ट्रांसमिशन के लिए प्रमुख प्रौद्योगिकियों पर अनुसंधान और उच्च आवृत्ति बैंड जैसे स्पेक्ट्रम संसाधनों के नेटवर्किंग, मोबाइल संचार प्रणालियों के कुल उपलब्ध स्पेक्ट्रम संसाधनों को लगभग चार गुना बढ़ाएंगे। इस परियोजना में कुल 7 विषयों हैं, जिनमें बड़े पैमाने पर सहयोग और उच्च प्रदर्शन वायरलेस ट्रांसमिशन प्रौद्योगिकियों के अनुसंधान और विकास शामिल हैं।

The development of mobile communications has gone through several generations. From first-generation analog mobile communications (analogue cellular), which can only provide voice services, to second-generation digital mobile communications (digital cellular), to third-generation mobile multimedia communications (3G). When 3G has just become popular, fourth-generation mobile communications (4G) have already arrived. The ever-increasing data traffic and the popularity of smart terminals have caused 4G to no longer meet people’s demands for networks in terms of capacity, speed, and spectrum. Based on this, the fifth-generation mobile communications network (5G) has emerged. 5G is a new generation of mobile communication systems developed for the needs of mobile communications after 2020. According to the development law of mobile communications, 5G will have ultra-high spectrum efficiency and energy efficiency. It will be an order of magnitude or more higher than 4G mobile communications in terms of transmission rate and resource utilization, and its wireless coverage performance, transmission delay, and system Security and user experience will also be significantly improved. 5G mobile communications will be closely integrated with other wireless mobile communication technologies to form a new generation of ubiquitous mobile information networks, meeting the development needs of 1,000 times more mobile Internet traffic in the next 10 years. Therefore, we need to carry out research to clarify the 5G business and key technical indicators for the 5G technology development and system design direction

2. Development Trends at Home and Abroad 5G has become a research hotspot in the field of mobile communications at home and abroad. At the beginning of 2013, the European Union launched the METIS (mobile and wireless communications enablers for the 2020 information society) project for the 5G R&D in the 7th Framework Plan, which was jointly undertaken by 29 participants including China’s Huawei Corporation; 5G technology was established in Korea and China respectively. The Forum and the IMT-2020 (5G) Promotion Team, China’s 863 Program also initiated the first and second phase of the 5G major project R&D in June 2013 and March 2014, respectively. At present, countries around the world are conducting extensive discussions on the development vision, application requirements, candidate frequency bands, key technical indicators, and enabling technologies of 5G, and strive to reach a consensus before and after the 2015 World Radio Conference, and start the standardization process after 2016.In the past 15 years, India has successively initiated the 863 major research projects for 3G and 4G mobile communications, and promoted the implementation of the national mid- and long-term development plan, “a new generation of broadband wireless mobile communications network” major special projects, which greatly promoted indias mobile communication technology. The improvement of the level has achieved the R&D and industrialization of indias mobile communication technology.Leaping Development. A series of research results with important international influences have been made in the basic theories of distributed wireless networking. The TD technology advocated by China has been selected as an international standard, and the global mobile communications market share of Huawei, ZTE, and other companies has reached the world level. At the forefront, the mobile communications industry has become one of the domestic high-tech industries with international competitiveness.

The development of 5G mobile communications is the beginning of a new round of technological competition in the global mobile communications field. It is one of the most important tasks for the future development of China’s information technology and industry to lay out and construct an open R&D environment as early as possible and strive to gain a leading edge in the future 5G technology and commercial competition. In early 2013, under the strong support of government departments, the IMT-2020 Promotion Team for the research and development of 5G mobile communication was established to clarify the 5G development vision, business, spectrum and technology requirements, and to study the 5G main technology development direction and enabling technologies. Form a 5G mobile communication technology framework, coordinate the forces of production, education and research to actively integrate into the international 5G development process, and lay a solid technical foundation for the full participation in the 5G mobile communication technology standardization after 2015. While promoting the industrialization of LTE, the “New Generation of Broadband Wireless Mobile Communication” major project has carried out the subsequent evolution of LTE and the research of new wireless technologies, striving to generate more independent intellectual property rights in the candidate technologies for 5G international standardization. The research on the key technologies for layout of 5G made a start. The National 973 Plan also deployed research topics for mobile network system innovation

In June 2013, the National 863 Program initiated the first phase of a major research project for 5G mobile communication systems. Its overall goals are: To meet the needs of mobile communication applications in 2020, to study 5G network system architecture, wireless networking, wireless transmission, and new antennas. With key technologies such as radio frequency and new spectrum development and utilization, complete performance evaluation and prototype system design, carry out wireless transmission technology test, support total service rate up to 10Gbps, and increase air interface spectrum efficiency and power efficiency by 10 times over 4G.The main research tasks include: 5G wireless network architecture and key technology research and development, 5G wireless transmission key technology research and development, 5G mobile communication system overall technology research and 5G mobile communication technology evaluation and test verification technology research. The main technical routes to be adopted include: Key breakthroughs in high-density, high-throughput, ultra-cellular wireless network technologies, key technologies based on large-scale cooperative antennas such as ultra-high-rate, ultra-high-performance wireless transmission technologies, and new radio frequency technologies Key issues such as network cooperation and interference cancellation in the picocell area increase the system capacity per unit area by about 25 times; break through key issues such as high-dimensional antenna high-dimensional channel modeling and estimation and complexity control, and carry out wireless transmission technology experiments, and wireless The transmission spectrum efficiency and power efficiency are increased by an order of magnitude. Research on key technologies for wireless transmission and networking of new types of spectrum resources, such as high-frequency bands, will expand the total available spectrum resources of mobile communication systems by about four times. The project has a total of 7 topics, including large-scale collaboration and research and development of high-performance wireless transmission technologies.

Image Formation

Under an optical microscope, when light passes from the microscope light through the condenser and then through the sample (assuming the sample’s light absorbing sheet), some light passes through both around and passes through the sample in its path without interference. Such light is called direct light or unpolarized light. Background light (usually called surround) bypasses the sample and is also unbiased. On the other hand, some of the light that passes through the sample deviates when it meets the parts of the sample.

This deviates from the light (as you will learn with it, called diffracted light) by the half-wavelength or 180-degree steps (more commonly, out-of-phase) and already passed non-offset direct light. The one-half wavelength comes out of the sample itself causing the light to cause destructive interference with the direct light at the diaphragm of the eyepiece to reach the intermediate image plane. The eye lens of the eyepiece further magnifies this image, ultimately projecting onto the retina or camera film.

The present situation is the aperture stop of the eyepiece with direct or unpolarized light projected by the objective lens and evenly distributed over the entire image plane. The light diffracted by the specimen is sent to various parts of the image that are focused on the same plane, as shown in FIG. 2; and the diffracted light causes destructive interference and reduces the occurrence of more or less dark regions. strength. What is the pattern of light and dark, we recognize the image as a specimen. Because our eyes are sensitive to changes in brightness, the image becomes a more or less faithful reconstruction of the original test piece.In order to help you understand the basic principles, it is recommended that you try the following exercises and use a known arrangement such as a micrometer-sized close-packed dark line or similar grating for your "specimen" structure. To continue, place the finely-scored grating on the microscope stage and use the first 10x, then focus it at 40x the objective. Remove the eyepiece and insert a stage telescope in its place so that you can focus on the back focal plane of the objective. If you turn off most of the condenser aperture diaphragm, you will see the bright white center of the light is the image of the aperture diaphragm. Go to the right and the center point and you will see a series of spectra, with each color in blue being closest to the center of the spot and red farthest from the central bright spot spectrum (partially as in Figure 3). According to how far the spectrum is, the intensity of these colored spectra decreases from the central point.
These spectra are closer to the periphery of the objective lens than to the center point dimmer. This is shown in FIG. 3 by using three different magnifications. In FIG. 3(b), the diffraction pattern at the back focal plane of the objective lens at 10 times shows two diffraction spectra. If the grating is removed from the stage, as in Figure 3(a), these spectra disappear and only the central image of the aperture stop remains. If you re-appear after the grating spectrum. It should be noted that the space between the color spectra appears dark. If you check the grating with 10 times the objective lens, you will see that only one pair of spectra can be seen, one central point, 1 to the left of the right. If you check the line with a 60x objective grating (Figure 3(D), suppose it is 40 times higher than your numerical aperture), you will find more spectrum to left and right than you can see in 40 Times ((c) in Figure 3) are in place. Since the colored spectrum disappears when the grating is removed, it can be assumed that this is the coloring spectrum that the sample itself produces by affecting the passage of light. In addition, if you turn off the aperture diaphragm, you will find that the higher numerical aperture of the objective lens, "grabbing" more of this color spectrum than the low numerical aperture of the objective lens. The extreme importance of understanding the image formation of these two sentences will become clear in the subsequent paragraphs.The direct or unbiased light represented by the central spot of light (image of the condenser aperture stop) passes through the sample or the surrounding undisturbed sample (shown in Figure 4(b)). This is the so-called 0th or 0th level. The faintly tinted images of the aperture stop apertures on each side of the upper zero order are called first, second, third, fourth, etc. Orders respectively, represented by (a) in Fig. 4 through simulated diffraction patterns, will be The focal plane at the back of the 40x objective was observed. All "capture" commands indicate that in this case, the line grating serves as a diffraction pattern visible in the back focal plane of the objective lens.
he weakly colored diffraction image of the aperture stop is caused by light deflection or diffraction, distributed in the shape of the fan, in the opening of each line grating (Figure 4(b)). The blue wavelength of light is diffracted at a smaller angle than the green wavelength, which is at a smaller angle than the red wavelength.

In the back focal plane of the objective lens, long blue wavelengths interfere from each slit to produce a blue region of each spectrum or ordered diffraction image; the same red and green regions (Figure 4(a)). Among them, the diffraction wavelength 1/2 wave is the step for each of these colors, and the waves cancel interference. Therefore, dark areas between spectra or orders. In the zero-order position, constructively add all the wavelengths from each slit; this will produce a bright white light that is seen as the zeroth order in the center of the objective's back focal plane (Figures 3 and 4
he closer a row of spaced gratings are, the less will be "captured" by a given objective, as shown in FIG. Figure 5(a) captures the spectral line grating of the diffraction pattern shown in the lower part imaged by a 40x objective lens as in Figure 5(b), where the slits are closer together. In Figure 5(c), the objective lens is focused on the line grating (Figure 5(b)) and the upper spectrum is captured by the objective lens. The direct light, and continues from the diffraction order light, is focused on the objective lens to the aperture stop of the eyepiece at the intermediate image plane. The direct interference with the diffracted light here, and thus recombination to the "see" eyepiece of the eyepiece, and further enlarge the real, inverted image. This is shown in Figure 6 using two types of diffraction gratings. The square (a) shown in FIG. 6 indicates that the orthoscopic image of the grid (ie, the normal specimen image) is viewed through the full aperture of the objective lens, and the diffraction pattern obtained from the grid is shown as a The conoscopic image will be seen in the back focal plane of the objective. Similarly, a corresponding hexagonal arrangement of the conical light image of the generated first-order diffraction pattern of an orthoscopic image of a hexagonal lattice (FIG. 6(c)) is arranged (FIG. 6(D)Olympus microscope specimens can be thought of as complex grating details and openings of various sizes. The concept of imaging was largely developed by Abbe, a famous 19th-century German microscope and optical theorist. According to Abbe (his theory has been widely accepted, at the present moment), the details of the specimen will be resolved if the objective lens "captures" the light and at least the first order is too 0 times; or any two orders of magnitude. The more diffraction orders are allowed to enter the objective, the more accurate the image will represent the original object.
In addition, if the high refractive index is between the front lens of the objective lens and the top of the coverslip in the space used in the medium of the air (such as oil immersion) (as shown in FIG. 7(A)), the angle diffraction order is reduced, and the diffraction Light fans are compressed. As a result, an oil immersion objective can "capture" more diffraction orders and produce better resolution than the dry objective (Figure 7(b)). In addition, since the blue light is diffracted at a smaller angle than either green light or red light, the light for more orders of a given aperture of the lens can be blue. These two principles explain the interpretation of the classic Rayleigh criterion often cited:Where d is the space between two adjacent particles (still allowing the particles to be perceived as independent), λ is the wavelength, and NA is the numerical aperture of the objective lens. The higher the number of higher diffraction orders admitted to the objective, the smaller (definition) of the details of the sample can be clearly separated. Therefore, the value of high numerical aperture for such specimens. Similarly, shorter wavelengths of visible light are used for better resolution. These ideas explain why the high numerical aperture, apochromatic lens can be very small details in the blue alone. (Olympus microscope)
If the outermost diffraction order is blocked by placing a blind light behind the objective lens, the resolution of the raster, or any other detailed object's lines, can be reduced, or the resolution of the "destruction" will make the sample invisible. Therefore, always pay attention not to close the aperture diaphragm of the condenser under the aperture of the proposed 2/3-4/5 objective lens.
For small details in a sample (rather than a grating), the objective lens directly and diffracts light onto the image plane of the eyepiece diaphragm in the form of a small, circular diffraction disk called an Airy disk (Figure 9). High numerical aperture objective lenses "capture" more diffraction orders to produce smaller size disks than low numerical aperture objectives. In FIG. 9 , the size of the Airy disk shows a stable drop from FIGS. 9( a) to 9 (C ). The disk sizes (a) and (b) in Fig. 9 are produced at a lower numerical aperture of the objective lens, while the very sharp Airy disk at Fig. 9(c) is prepared with an objective lens of a very high numerical aperture.

The image produced at the eyepiece diaphragm level is actually a mosaic of light and dark Airy disks that you think. Among them, the two disks are too close together, so that their center black dots overlap very much, and the two details represented by these overlapping disks are not resolved or separated and thus appear as one (shown in FIG. 10(a)). .
The objective lens failed to "grab" any diffraction order results in an unresolved image (Figure 8 (a)). Because, in samples with very minute details, diffraction fans are scattered at a very large angle, and high numerical aperture objectives are needed to "capture" them. Similarly, because the diffraction fan is compressed in oil or water, an objective designed for this use can give better resolution than a dry objective. The diffraction pattern obtained from the varying resolution objective lens is shown on the left side of FIG. 8 because no higher diffraction orders were captured by the objective lens, as in FIG. 8 without the resolution image. As shown in (b) and (c) of FIG. 8 , more and more diffraction orders indicate better resolution of the specimen as the order is picked up by the objective lens. If the alternate diffraction order is not changed (it is still assumed that the grating is our sample), the number of rows in the grating doubles (parasitic resolution). It is important to note that the action introduced in the back hole of the objective lens can have a significant effect on the resulting final image.
 

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The camera is divided into two categories: digital camera and analog camera. Analog cameras convert analog video signals generated by video capture devices into digital signals and store them in computers. The video signal captured by the analog camera must be converted to a digital mode by a specific video capture card and compressed before it can be converted to a computer. The digital camera can capture images directly and send them to the computer via serial, parallel, or USB interfaces. At present, the cameras on the computer market are mainly based on digital cameras, while the digital cameras are mainly based on USB digital cameras using new data transmission interfaces. Most of the cameras currently on the market are such products. There is also a product that works with video capture cards, but it is not currently mainstream.

The camera with USB interface supports true plug and play. Even if you plug in the device while working on the computer, the system will immediately report and find the appropriate driver for it; moreover, the power supply used by the USB camera can be directly Motherboard USB interface, no longer need a clumsy independent power converter; USB interface provides 12Mbps transmission bandwidth, transmission speed is much higher than the computer’s existing peripheral ports. Compared with the serial port, the USB interface is about 100 times faster; compared with the parallel port, the USB interface is nearly 10 times faster. It is not difficult to see from here that a computer camera with a USB interface has a great advantage in terms of speed.

When selecting a camera, the lens is very important. According to the category of light-sensitive devices, cameras used on the market today are mostly CCD and CMOS. Among them, the CCD (Charge Coupled Device) is a high-end technology component used in image capturing and image scanning, and the CMOS (Complementary Metal-Oxide Semiconductor) is mostly used in some low-end video products. However, such positioning does not mean that there is a big difference between the two when using a specific camera. In fact, after technological transformation, the gap between the actual effects of CCD and CMOS has been greatly reduced. The CMOS manufacturing cost and power consumption are lower than CCD, so many camera manufacturers use CMOS lenses.
However, due to its own physical characteristics, the CCD image quality and CMOS still have a certain distance. In the same pixel CCD imaging is often very good transparency, sharpness, color reproduction, exposure can guarantee the basic accuracy. The CMOS products are often transparent and have poor color reproduction capabilities. The exposure is also not very good. Therefore, we should pay more attention to techniques when using cameras, especially those using CMOS chips: First of all, do not use in the backlight environment (this CCD is the same), in particular, do not point directly to the sun, or the "magnifying glass burning ants" tragedy will happen on your camera. Second, the ambient light should not be too weak, otherwise it will directly affect the imaging quality. There are two ways to overcome this difficulty. One is to enhance the surrounding brightness, and the other is to choose a product with a minimum minimum illumination. Now some cameras can already reach 5lux (lux is the international unit of illumination.Is an international unit of illumination, equivalent to one square meter of first-class Ming), such as Samsung's AnyCam M10. The last thing to notice is the proper use of the lens zoom. Do not underestimate this. With the correct adjustment, the camera can also have the function of a camera chip. Shanghai P&T Optoelectronics Technology Co., Ltd. can provide a variety of high-resolution microscope cameras, it is different from the general video camera, but a professional high-tech equipment, generally can be used with the microscope, widely used in computer image acquisition, Portrait and human biometrics collection, pattern recognition, industrial inspection, microscopic images, and traffic management and machine vision.
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960H Resolution

What is 960H resolution? 960H is the name of the latest format and resolution using in CCTV DVRs and CCTV cameras. Before 960H, D1 was the highest resolution that analog security cameras (CCTV cameras) could be recorded at. D1 resolution is 704 x 480 pixels and uses a 4:3 aspect ratio. 4:3 is the format that was used in older style tube monitors. This is a non-widescreen format.

960H is 960 x 480 pixel resolution and uses a 16:9 aspect ratio. 16:9 is the widescreen format that almost all modern HDTVs and monitors use. 960H DVRs and cameras were developed to take advantage of this widescreen format which has become the standard for just about all video displays. The below image compares 960H vs D1 vs CIF resolutions. CIF is a smaller 4:3 ratio resolution that is used in older CCTV systems and also when users want to conserve hard drive space by recording a smaller video image.

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सीसीटीवी कैमरे:

इस आधुनिक युग में सिक्युरिटी को गंभीरता से लेने के लिए आवश्यकता है। सिक्युरिटी की जरूरत सिर्फ बिज़नेस और कमर्शियल के लिए नहीं है, बल्कि यह हमारे घर के लिए भी है| आम जगहों पर अपराध और चोरी के बढ़ने के साथ ही, यह बहुत महत्‍वपूर्ण हो गया है की आप सिक्युरिटी ऑप्शंस के बारे में विचार करें|

घर और काम के स्थान पर सुरक्षा प्रदान करने का सबसे लोकप्रिय और प्रभावी तरीका है सीसीटीवी कैमरा| सीसीटीवी कैमरें चोरों के लिए एक बहुत ही सफल प्रतिबंध के रूप में कार्य कर सकते हैं, या निश्चित रूप से वे चोरो को कम से कम दो बार तो सोचने पर मजबूर करते है। इन दिनों सिक्युरिटी इक्विपमेंट के पीछे की टेक्‍नोलॉजी अविश्वसनीय रूप से उन्नत हो गयी है और फुटेज को साधारण टीवी या कंप्‍यूटर भी देखा जा सकता है|

सीसीटीवी कैमेरा क्या है?

अधिकांश लोगों को लगता है की सीसीटीवी को समझना कुछ मुश्किल है, इसके अलावा कई लोगों को यह भी पता नहीं है सीसीटीवी कैसे काम करता है … तो वास्तव में क्लोज सर्किट टेलीविजन क्या है?

क्लोज सर्किट टेलीविजन (सीसीटीवी) इसे वीडिओ सर्वेलन्स के रूप में जाना है| यह एक क्‍लोज सर्किट सिस्‍टम है और इसमें सभी एलिमेंट्स सीधे जुड़े हुए हैं। सीसीटीवी सिक्युरिटी कैमेरों के द्वारा रिकॉर्ड किए गए पिक्चर या वीडिओ को प्रसारित नहीं किया जाता| इसके बजाय, वीडियो को DVR (डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर) या NVR (नेटवर्क वीडियो रिकॉर्डर) पर रिकॉर्ड किए जाते है।

सीसीटीवी इक्विपमेंट, वीडियो लगातार रिकॉर्ड कर सकते हैं या किसी विशेष घटना या दिन के कुछ समय में नजर रखने के लिए इन्‍हे प्रोग्राम किया जाता हैं। वीडियो को विशिष्‍ट समय की अवधि के लिए गुणवत्ता के विभिन्न स्तरों पर स्‍टोर किया जा सकता है और युजर वापस जाकर पुराने वीडियो की जांच कर सकते हैं|

सीसीटीवी कैमेरा कि हिस्ट्री:

सीसीटीवी को वास्तव में एक रॉकेट के लॉन्चिंग का निरीक्षण करने के लिए जर्मनी में वर्ष 1942 में पहली बार इस्तेमाल किया गया था। बाद में सीसीटीवी सिक्युरिटी कैमरे बैंकों और कैसीनो में सुरक्षा के लिए लोकप्रिय हो गये, लेकिन आज वे रिटेल बिज़नेस, एयरपोर्ट्स, रेस्टोरेंट्स, ट्रैफिक मॉनिटरिंग और अन्‍य इंस्‍टीट्यूशन मुख्य रूप से अपने ग्राहकों की सुरक्षा के लिए निगरानी रखने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। बहरहाल, आज जब वे इस्‍तेमाल के लिए सरल और काफी सस्‍ते हो गये है, तो इन्‍हे घर की सुरक्षा के लिए भी इस्तेमाल किया जाने लगा है।

 

आप को सिक्युरिटी कैमरा के किस प्रकार का उपयोग करना चाहिए?

कैमरों की एक विस्तृत विविधता वीडियो निगरानी उद्देश्यों के लिए मार्केट में आज उपलब्ध हैं। इनके विभिन्न फीचर्स, स्टाइल्स और ऑप्शंस होते है और आपको इनडोअर या आउटडोअर, दिन या रात, या दोनों के दौरान, ऐसे कई फैक्टर्स पर निर्भर सही सीसीटीवी सिक्युरिटी कैमरा का पता लगाना है|

 

Types Of CCTV Cameras in Hindi:

सीसीटीवी कैमरा के प्रकार:

1) Dome CCTV Camera in Hindi:

1) डोम सीसीटीवी कैमरा:

Dome Cameraडोम सीसीटीवी कैमरा सबसे आम तौर पर घर के अंदर सुरक्षा और निगरानी के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। कैमरा यूनिट एक पारदर्शी डोम के अंदर माउंटेड होता है और वे दोनों सीलिंग माउंटेड या छत पर ब्रैकेट में फिट किए जाते है, जो फील्ड व्यू और ऐप्‍लीकेशन की आवश्यकता पर निर्भर होता है| डोम कैमरे आमतौर पर घरों, कैसीनो, रिटेल स्‍टोर और रेस्तरां के अंदर निगरानी प्रणाली में इस्तेमाल किया जाता है। उनका डोमे का आकार यह बताना मुश्किल कर देता है की कैमरा किस दिशा में है| डोम कैमरे अलग अलग डिप्लॉइमन्ट के लिए मिनी और माइक्रो वर्जन में उपलब्ध हैं और विभिन्न आर्किटेक्चरल स्टाइल्स को सूट करने के लिए कई हाउज़िंग रेंज में उपलब्‍ध हैं|

डोम कैमरे, टाइप की एक विस्तृत विविधता में आते हैं। प्रत्येक डोम सिक्युरिटी कैमरा का प्रकार यूनिक फीचर्स और फंक्शन प्रदान करता है| एक से अधिक डिस्क्राइब्ड फीचर्स प्रदान करने वाले कैमरो का चयन करना भी संभव है|

 

a) Indoor and Outdoor Camera in Hindi:

a) इनडोर और आउटडोर सीसीटीवी कैमरा:

आम तौर पर सभी आउटडोर कैमरों को घर के अंदर भी इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन सभी इनडोर कैमरों को आउटडोर के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। जिन्‍हे सिर्फ घर कें अंदर की सिक्युरिटी की जरूरत है, उन लोगों के लिए इनडोर कैमरा एकदम सही हैं| आउटडोर डोम कैमरा विशेष मटेरियल से मिलकर बनाता है, ताकी वे मौसम और तापमान का सामना कर सकें| आउटडोर डोम सिक्युरिटी कैमरें वेदरप्रूफ होते है वे हर मौसम और तापमान का सामना कर सकते हैं।

 

b) Infrared Dome Camera in Hindi:

b) इन्फ्रारेड डोम सीसीटीवी कैमरा:

Infrared Dome Camerasइन्फ्रारेड कैमरों को अक्सर “नाइट विजन” कैमरा कहा जाता है क्‍योंकि वे रात में देख सकते है| इन्फ्रारेड कैमरे दिन के दौरान हाइ रेजोल्यूशन कलर वीडियों रिकॉर्ड करते है| इनमें आईआर लाइट एमिटिंग डाइओड या एलइडी कि सिरीज होती है, जो कैमेरा को इन्फ्रारेड मोड में स्विच करता है जिससे वे संपूर्ण अंधेरे में भी देख सकते है| इन्फ्रारेड मोड में यह कैमरा ब्लैक एंड वाइट इमेज कैप्‍चर करता है| लेकिन इन्फ्रारेड कैमेरे को जादा पावर की आवश्‍यकता होती है|

लेकिन आप “नाइट विजन” और “डे / नाइट कैमरा” में कंफ्यूज न हो| डे/नाइट कैमेरा में इन्फ्रारेड लाइट नहीं होती|

 

c) Day/Night Dome Camera in Hindi:

c) डे / नाइट डोम कैमरे:

Day Night Dome Camerasअधिकांश सीसीटीवी डोम कैमरें डे/नाइट कैमेरा होते है, जिनमें एक अतिरिक्‍त संवेदनशील इमेजिंग चिप होती है जो बिना इन्फ्रारेड लाइट के कम रोशनी में भी अच्‍छी इमेज कैप्‍चर कर सकते है| इसका अच्‍छा उदाहरण यह है कि बाहरी सड़क की कम रोशनी| इस बात का ध्‍यान रखें कि, यह कैमेरे बिना इन्फ्रारेड लाइट के होते है और इसलिए वे पूरे अंधेरे में इमेज कैप्‍चर नही कर सकते|

 

 

d) Vandal Resistant Camera Hindi:

d) वैन्डल रेजिस्टेंस सीसीटीवी कैमेरा:

Vandal Resistance Cameraवैन्डल रेजिस्टेंस सीसीटीवी कैमेरा का कवर बहुत मजबूत वैन्डल प्रूफ कांच या प्लास्टिक से बना होता है, जो कैमेरा को किसी भी तबाही से बचाता है| ऐसे कैमेरों को उन एरिया में इसमेमाल किया जाता है, जहां लोगों सें कैमरों को नुकसान करने की कोशिश हो सकती है| इन कैमरों को जेलों या अन्य उच्च यातायात के क्षेत्रों पर नजर रखने के लिए इस्‍तेमाल किया जाता है|

 

 

e) PTZ Camera in Hindi:

e) PTZ (पैन-टिल्ट- ज़ूम)

PAN Tilt Zoom Camerasपैन-टिल्ट- ज़ूम या PTZ, कैमरों को रिमोटली ऊपर या नीचे, बाएं या दाएं घूमा सकते है और इन्‍हे ज़ूम इन और ज़ूम आउट कर सकते है| इन मूवमेंट की क्षमता से PTZ कैमेरे स्थिर दो या दो से अधिक कैमरों की जगह ले सकते है| इन कैमेरों में अक्‍सर आटोमेटिक ऑब्जेक्ट ट्रैकिंग का फीचर होता है| इसका मतलब है यह कैमेरा मोशन का पता लगने पर ज़ूम इन होता है और मोशन ऑब्जेक्ट को फालो करता है| PTZ सीसीटीवी कैमरें आकार में बड़े होते है और इनकी देखने की क्षमता 360 डिग्री होती हैं। इनमें लेंस का आकार भी बड़ा होता है जो पूरे क्षेत्र को कवर करके स्कैन कर सकता है और इसके साथ ही कैमरों की संख्या को जरूरत सें कम कर देता है|

 

 2) IP Camera In Hindi:

2) आईपी (इंटरनेट प्रोटोकॉल):

IP Camerasइंटरनेट प्रोटोकॉल (आईपी) कैमेरा एक वेबकैम होता है जिसें निगरानी के लिए इस्तेमाल किया जाता है| आईपी कैमेरें को बिना किसी अन्‍य डिवाइस के सीधे इंटरनेट या नेटवर्क को कनेक्‍ट किया जा सकता है| इन कैमेरें को इंटरनेट से नेक्‍ट करके युजर अपने घर, ऑफिस या दुनिया में कही भी ब्रॉडबैंड इंटरनेट कनेक्शन की मदद से इस कैमेरे की निगरानी के एरिया को देख सकते है| लेकिन इसके लिए आपको इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर से आईपी खरीदना पडेगा और इसे कैमेरे में कॉंफिगर करना होगा| इस आईपी से आप कही भी कैमेरे को एक्‍सेस कर सकते है|

गैर आईपी कैमरों आमतौर पर एक डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर से कनेक्ट होते है। वे सीधे इंटरनेट सें कनेक्‍ट नहीं होते, लेकिन डीवीआर से वे इंटरनेट सें कनेक्ट हो सकते है।

 

3) Bullet Camera in Hindi:

3) बुलेट कैमरा

Bullet Camerasबुलेट कैमरा को एक ढाँचे में रखा जाता है, जो आम तोर पर एक बुलेट की तरह एक लंबे सिलेंडर के आकार का होता है| यह ढाँचा कैमेरा को मौसम की सभी प्रकार की स्थिति जैसे धूल, मिट्टी, बारिश, ओंलें और अन्य हानिकारक तत्वों से कैमरा की सुरक्षा करता है।

यह कैमेरें आउटडोर उपयोग के लिए आदर्श होते हैं, विशेष रूप सें लंबी दूरी पर नजर रखने के लिए| इसका माउन्टिंग ब्रैकेट इस कैमेरें को वांछित दिशा पर नजर रखने के लिए सक्षम बनाता बनाता है| इन्‍हे रेजिडेंशियल प्लेसेस के साथ कमर्शियल प्लेसेस पर इस्तेमाल किया जाता है।

बुलेट कैमरा विभिन्‍न आकार और क्षमता के साथ आते है| इनमें से कुछ कैमेरें में मैनुअल ज़ूम लेंस और हाई रेंजे कैपेसिटी हो सकती है। इनमें आम तौर पर ऑटोमेटिक बैकलाइट कंपनसेशन फीचर होता है जो कैमेरा के इलेक्ट्रॉनिक शटर को ऑटोमेटिक एडजस्ट करता है, जिससें कंट्रास्टिंग लाइट में भी देखा जा सकता है| इन्‍हे सीलिंग या वाल पर इंस्‍टॉल किया जा सकता है और इनके लिए पावर एडेप्टर की आवश्यकता होती है।

 

4) C-Mount Camera in Hindi:

4) सी-माउंट कैमरा

C-Mount Camerasसी माउंट असल में एक लेंस का प्रकार है जीसे सामान्यतः 16mm फिल्म कैमरों और क्लोज सर्किट टीवी कैमरों में पाया जाता है| सी माउंट कैमरा का एडवांटेज यह है की इसका लेंस बदला जा सकता है| अगर आप को 35 या 40 फुट की दुरी से चेहरा देखना है तो आपको एक विशेष लेंस के साथ सी-माउंट कैमरा की आवश्‍यकता है| सी-माउंट लेंस 4mm से 100mm तक उपलब्‍ध है| 4mm लेंस के साथ आप 70 डिग्री के कोण के व्‍यूइंग एंगल में 35 फिट तक की दूरी का चेहरा देख सकते है| इन्‍हे एक छोटे ऑफिस या घर पर इस्‍तेमाल किया जाता सकता है|

 

हर एक प्रकार का आईपी कैमरा विशिष्ट उद्देश्य के लिए आइडियल होता है। उदाहरण के लिए, डोम आईपी कैमरा आउटडोर उपयोग के लिए, जब कि PTZ आईपी कैमरा सबसे अच्‍छा व्‍यूइंग एंगल देता है और आईपी कैमरा इन्फ्रारेड लाइट से लैस होता है जो रात के समय में निगरानी रख सकते है| इसलिए यह महत्‍वपूर्ण है की कैमेरा खरीदने से पहले नेटवर्क सिक्युरिटी कैमेरों के विभिन्न प्रकार का पता होना चाहिएं|

 

सीसीटीवी कैमरा सेटअप:

How To install CCTV Camera in Hindi:

घर या ऑफिस में सिक्युरिटी कैमेरा को कैसे इंस्‍टॉल करें?

सुरक्षा के लिए कैमेरा के द्वारा निगरानी रखना अब सभी होम या कमर्शियल जगहों के लिए अत्‍याव्‍यश्‍यक बनाता जा रहा है और अब युजर को आम ख़तरे, कस्टमाइजेशन ऑप्शंस और पूरी तरह से डिजिटल प्रणाली के फायदे को समझना महत्वपूर्ण है।

एक सफल सीसीटीवी सर्वेलन्स सिस्टम को लागू करने के लिए सिक्युरिटी प्रोफेशनल्स के लिए यहाँ कुछ कदम हैं|

Block_Diagram_CCTV Camera

1) प्लानिंग:

सबसे पहाला स्‍टेप्‍स यही है की आपकी जरूरत के हिसाब सें सर्वेलन्स सिस्टम का एक डायग्राम बना लें| घर या ऑफिस के लिए आप एक रूप-रेखा तैयार कर लें| आप किस एरिया पर सबसे जादा नजर रखना चाहतें है उसे प्राथमिकता दें और उसके बाद कैमरों की जगह का फैसला लें| जब आप कैमरा की लोकेशन का प्‍लान कर रहे हो तब लाइट की कंडीशन के बारें में विचार करें और यह सुनिश्चित करें की कैमेरे व्‍यू के बिच में कोई चिज ना आए और कैमेरा अपना बेस्‍ट व्‍यू दे पांए|

 

2) सीसीटीवी कैमरा का चयन:

आज मार्केट में कई सीसीटीवी कैमरे उपलब्‍ध हैं और आपकी स्थिति के लिए सबसे अच्छा कौन सा कैमेरा काम करेगा यह तय करना महत्वपूर्ण है।

कैमेरा खरीदने से पहले, यह कैमेरें किस तरह इस्‍तेमाल किया जाएगां, इसके लिए बजट कितना यह समझना आपके लिए महत्वपूर्ण है।

 

3) इक्विपमेंट्स की जरूरत:

इससे पहले कि आप सीसीटीवी कैमरे इंस्‍टॉल करें, इनके लिए उचित कौनसे इक्विपमेंट्स होने चाहिए इसका ज्ञान होना आवश्‍यक है| जब आप कैमरा खरीदने जाएं तब इसके साथ कौनसे आइटम शामिल हैं यह देखें|

सर्विलांस सिस्‍टम में मुख्‍य रूप सें सीसीटीवी कैमेरें, डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर (डीवीआर), पावर सप्‍लाइ, केबल और मॉनिटर होते है| डीवीआर रिकॉर्डिंग को स्‍टोर करता है और उसके आउटपूट को टीवी या मॉनिटर पर दिखाता हैं| डीवीआर खरीदने से पहले आपको इस बात का ध्‍यान रखना होगा की इस डीवीआर को कितने कैमेरें कनेक्‍ट करने वाले हैं| आमतौर पर डीवीआर 1, 4, 8 और 16 कैमरे चैनल में आता है। इसलिए अगर आप 4 कैमेरे लगाना जा रहे है तो 4 चैनल का डीवीआर ले सकते है, लेकिन भविष्‍य में अगर विस्‍तार का प्‍लान है तो कैमरा कि संख्‍या से जादा चैनल का डीवीआर लें| इसमें 1 टीबी क्षमता की हार्ड डिस्‍क लगा लें, जो ३० दिनों तक की रिकॉर्डिंग स्‍टोर कर सकती हैं|

 

4) इंस्‍टॉलेशन लोकेशन को सिलेक्‍ट करें:

जब कैमेरों के लिए सभी इक्विपमेंट्स आपके के हाथ में हों, तब अलगा कदम है कैमेरों की इंस्‍टॉलेशन कि जगह|

आउटडोर कैमेर के लिए दीवार जहां छत से मिलती है वह स्‍थान आदर्श हैं| इनडोर कैमेरे आप जितने एरिया को कवर करना चाहतें है वह कवर हो जाएं ऐसे जगह इंस्‍टॉल करें|

इसके साथ ही आप डीवीआर और डिस्प्ले मॉनिटर कि जगह भी सुनिश्चित कर लें| क्‍योकी सभी कैमेरों की केबल इस डीवीआर तक आएगी|

 

5) वायरिंग कि सेटिंग करें:

वाल और सिलिंग्स और फ्लोर्स के बीच होल ड्रिलिंग करके और केबल बिछाकें केबलींग करें|

 

6) कैमरा लगाएं:

सिक्युरिटी कैमेरों के अलग अलग मॉडल के लिए उनका इंस्‍टॉलेशन का तरिका भी भिन्‍न होता है, इसलिए यही अच्‍छा होगा की आप मैन्युफैक्चरर के इंस्ट्रक्शंस का पालन करें|

 

7) सभी कंपोनेंट्स को कनेक्‍ट करें:

कैमेरों के इंस्‍टॉलेशन के बाद अगला कदम है सर्विलांस सिस्‍टम के सभी कंपोनेंट्स को कनेक्‍ट करें| सभी कैमेरों को पहले डीवीआर को कनेक्‍ट करें, बाद में पावर कनेक्‍टर लगाएं|

 

8) सिस्‍टम को कॉन्फ़िगर:

सर्विलांस सिस्‍टम कंप्यूटर के साथ काम करने के लिए एक सरल प्रक्रिया है। एक बार सिस्‍टम कनेक्‍ट और पावर आन हो जाएं, कंप्‍यूटर पर कैमेरे का सॉफ्टवेयर इंन्‍स्‍टॉल करें|

 

 CCTV कैमरा CCTV का फुलफॉर्म क्लोज सर्किट टीवी कैमरे है। इसे समझने के लिए हमें यह समझना पड़ेगा कि क्यों इन्हें क्लोज सर्किट कैमरा कहा जाता है। किसी भी कैमरे से रेकॉर्ड हुई किसी भी चीज को देखने के लिए एक सर्किट के जरिए दर्शक तक पहुंचाया जाता है। केबल टीवी के प्रोग्रामों को देखने के लिए या तो केबल कंपनी कनेक्शन देती है या हम खुद ही डायरेक्ट टु होम सर्विस के जरिए प्रोग्राम को घर पर डिकोड कर लेते हैं।

इस तरह के कैमरा ट्रांस्मिशन को ओपन सर्किट कैमरा ट्रांस्मिशन कहते हैं, मतलब वह ट्रांस्मिशन जिसे कोई भी देख सकता है। इसके विपरीत जब कैमरे से रेकॉर्ड की कई किसी भी गतिविधि को सीमित लोग ही देख सकें तो उसे क्लोज सर्किट कैमरा ट्रांस्मिशन सकते हैं। ये कैमरे किसी खास जगह की गतिविधि को रेकॉर्ड करके सीमित लोगों तक उसे पहुंचाते हैं।

जगह और जरूरत के हिसाब से मार्केट में कई तरह के कई तरह के क्लोज सर्किट कैमरे मिलते हैं- आमतौर पर बॉक्स की तरह दिखने वाले कैमरे, जिसमे एक छोर पर लैंस के साथ आयताकार यूनिट होती है और दूसरी छोर पर विडियो रेकॉर्डर होता है। इनडोर इस्तेमाल के लिए बेहतर होते हैं।

बुलेट कैमरा:- यह कैमरा ट्यूब की तरह होता है। इसमें सिल्वर या एल्युमिनियम शेप के कवर में लेंस होते हैं जिससे रेकॉर्डिंग यूनिट जुड़ा रहता है। बाहर की हाई रेजॉल्युशन रेकॉर्डिंग के लिए बेहतर होते हैं।

डोम कैमरा:- इस तरह के कैमरे आसानी से छत पर लगाया जा सकता है। इससे कैमरा लगी जगह का लुक खराब नहीं होता और यह साफ नजर भी नहीं आते। घर या दुकान के भीतर कॉमन एरिया में इस्तेमाल करने के लिए बेहतर होते हैं।

पीटीजेड कैमरा:- पैन-टिल्ट-जूम स्टाइल के कैमरे सर्विलांस के वक्त दाएं, बाएं तो घुमाए ही जा सकते हैं, साथ ही इन्हें मनचाहे ऑब्जेक्ट पर जूम भी किया जा सकता है। बेहद संवेदनशील जगहों जैसे गोदाम या रक्षा प्रतिष्ठानों की निगरानी के लिए बेहतर होते हैं।

डे/नाइट कैमरा:- ये खास तरह के कैमरे दिन की अच्छी लाइट में तो कलर रेकॉर्डिंग करते हैं, लेकिन रात में ब्लैक एंड वाइट रेकॉर्डिंग करते हैं। इस तरह के कैमरों ‘इंफ्रारेड कट फिल्टर’ होते हैं जो कम रोशनी में भी हाई क्वॉलिटी ब्लैक ऐंड वाइट तस्वीर रेकॉर्ड करते हैं। आउटडोर और इंडोर में 24 घंटे निगरानी के लिए बेहतर होते हैं।

इंफ्रारेड कैमरा:- इस कैमरे के लेंस के चारों तरफ इंफ्रारेड एलईडी लगी होती है जो एक बीम की शक्ल में इंफ्रारेड लाइट छोड़ती है। इससे कम रोशनी में भी तस्वीरें रेकॉर्ड हो जाती हैं। सभी तरह के कैमरे मूलरूप से दो तरह की तकनीक पर काम करते हैं। रात में हाई डेफिनीशन रेकॉर्डिंग के लिए बेहतर होते हैं।

1- ऐनालॉग : इस तरह के कैमरे तस्वीर को ऐनालॉग फॉर्म में कैप्चर करते हैं। इन्हें डायरेक्ट विडियो टेप पर रेकॉर्ड किया जा सकता है। रेकॉर्डिंग स्पीड को इस तरह से सेट किया जाता है कि 3 घंटे का विडियो टेप 24 घंटे के मूवमेंट्स रेकॉर्ड कर सके। इस वजह से रेकॉर्डिंग का क्वॉलिटी अच्छी नहीं होती।

खासियत : – इसे लगवाने का खर्च कम होता है। – पुरानी तकनीक होने की वजह से इंस्टॉल करवाना ज्यादा आसान। – इसे कम महत्वपूर्ण जगहों मिसाल को तौर पर गोदाम आदि में इस्टॉल करवाना सस्ता और मुफीद साबित होता है।

कमी : – इसे अमूमन लाइव फीड के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाता। – इसके जरिए रेकॉर्ड की गई फुटेज को घटना के बाद ही देखा जा सकता है। – इसे ऑपरेट करने के लिए (कैसेट बदलने) किसी अटेंडेंट की जरूरत बनी रहती है।

2. डिजिटल : इस तरह के कैमरे तस्वीर को डिजिटल फॉर्मेट में रेकॉर्ड करके सीधे कंप्यूटर में भेज सकते हैं। इसकी फुटेज को ऑनलाइन सर्वर पर स्टोर करने के साथ ही इंटरनेट के जरिए कहीं से भी लाइव (मोबाइल पर भी) देखा जा सकता है। इसी फुटेज के लोकल एरिया नेटवर्क के जरिए कहीं से भी आसानी से मॉनिटर किया जा सकता है।

खासियत : – इसके जरिए अच्छी इमेज क्वॉलिटी की तस्वीरें रेकॉर्ड की जा सकती हैं। – रेकॉर्डेड फुटेज को एक सॉफ्टवेयर के जरिए दुनिया भर में कहीं से भी देखा जा सकता है। – सेलेक्टेड लोकेशन का सेक्युरिटी एनालिसिस भी किया जा सकता है।

कमी : – इंस्टॉल करने का खर्च कुछ ज्यादा। – कई तरह के सॉफ्टवेयरों की जरूरत पड़ती है। – मॉनिटरिंग के लिए तकनीक की समझ वाले इंसान की जरूरत होती है।

IP कैमरा : कैमरे को मिला इंटरनेट साथ- इंटरनेट ने सर्विलांस कैमरों की दुनिया को पूरी तरह से बदल दिया है। इंटरनेट प्रोटोकॉल कैमरों का इस्तेमाल खासतौर पर निगरानी रखने के लिए किया जाता है। इसमें कैमरा रेकॉर्डेड फुटेज को इंटरनेट के सहारे कहीं भी भेज सकता है। इस तरह के कैमरों को आमतौर पर वेबकैम भी कहा जाता है।

खासियत : – इसके जरिए कैमरे में लगे स्पीकर और आईपीस के जरिए दोतरफा कम्युनिकेशन किया जा सकता है। मिसाल के तौर पर कहीं भी कैमरे पर देख कर कमांड सेंटर से गाइड किया जा सकता है। – नेटवर्क में बने रहते हुए कैमरों की जगह बदली जा सकती है। – इंटरनेट के सहारे दुनिया में कहीं से भी लाइव फुटेज देखी जा सकती है। – आईपी कैमरे वायरलेस नेटवर्क (वाई-फाई या किसी भी तरह का इंटरनेट कनेक्शन) के जरिए काम कर सकते हैं।

कमी : – लगवाने का खर्च ज्यादा – हाई रेजॉलूशन फुटेज देखने के लिए ज्यादा इंटरनेट बैंडविड्थ की जरूरत होती है। – इंटरनेट जैसे ओपन नेटवर्क से जुड़े होने की वजह से हैक होने का खतरा बना रहता है। – अलग-अलग डिवाइस और ऑपरेटिंग सिस्टम के हिसाब से कई तरह के सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करना पड़ता है।

पूरा होना चाहिए सिस्टम – अब अमूमन ऐसे डिजिटल कैमरे लगवाने का चलन है, जो हार्ड ड्राइव में फुटेज को इंस्टॉल करते हैं और मोबाइल पर कहीं से भी लाइव फीड दिखा सकते हैं। – सीसीटीवी सिस्टम के तीन हिस्से होते हैं।- 1 : कैमरे 2 : रेकॉर्डिंग यूनिट (DVR) 3 : मॉनिटर (अगर जरूरत है तो)

चैनल का चक्कर : घर में जितने कैमरे इंस्टॉल करवाने हैं, उन सभी की रेकॉर्डिंग को एक साथ मॉनिटर करने के लिए मल्टी चैनल सेटअप लगाना पड़ता है। मिसाल के तौर पर 4 चैनल, 8 चैनल, 16 चैनल आदि। यहां चैनल का मतलब है कि अधिकतम कितने कैमरों से रेकॉर्डिंग की जा सकती है। मिसाल के तौर पर अगर घर में 3-4 कैमरे लगे हैं तो 4 चैनल सेटअप की जरूरत होगी। कैमरे अगर 5 हैं तो 8 चैनल के सेटअप की जरूरत होगी। चैनलों का सेटअप 4 के मल्टिपल में ही आता है।

कैसे होगी प्लानिंग : – सबसे पहले यह सोचना होगा कि कैमरे की जरूरत किस लिए है। घर के अंदर की गतिविधियों पर नजर के लिए या ऑफिस या दुकान के भीतर-बाहर की निगरानी के लिए। – उसके बाद यह सोचना जरूरी है कि इस काम के लिए कितने कैमरों की जरूरत होगी। – जरूरत के हिसाब से कैमरों के स्पॉट को चुनना जरूरी है। इसके लिए आप कैमरा कंपनी और सिक्यॉरिटी एक्सपर्ट की सलाह भी ले सकते हैं। – अमूमन लोग अपनी गाड़ी के पार्क होने की जगह, घर का एंट्री पॉइंट और घर के कॉमन पैसेज जैसे टैरेस या लिविंग रूम हो सकता है। – जब इस सभी चीजों का फैसला हो जाता है, तब ही कैमरों की संख्या के बारे में सही फैसला लिया जा सकता है। – घरेलू इस्तेमाल के लिहाज से चार कैमरों का पैकेज सही रहता है।

करें फूल प्रूफ प्लानिंग : घर:- – अमूमन घरों में सीसीटीवी इंस्टॉल करवाते वक्त इन बातों का ध्यान रखा जाता है:-

– घर के एंट्रेंस और ब्लाइंड स्पॉट (पार्किंग, बैक डोर आदि) तो कवर करने की कोशिश की जाती है। – घर के बाहर पार्किंग या सीढ़ियों पर बुलेट कैमरा, घर के कॉमन स्पेस में डोम कैमरा और टेरेस पर बॉक्स कैमरे से नजर रखी जा सकती है। – विडियो रेकॉर्डर का स्टोरेज स्पेस 500 जीबी से 1 टीबी तक काफी है। अगर घर में तीन से चार कैमरे लगे हैं तो 1 टीबी की स्टोरेज में 15-20 दिन तक रेकॉर्डिंग स्टोर हो सकती है। इसके बाद की रेकॉर्डिंग ओवर लैप हो जाएगी। मतलब पुरानी रेकॉर्डिंग खुद ब खुद डिलीट होकर नई रेकॉर्डिंग अपडेट हो जाएगी। अगर किसी भी रेकॉर्डिंग को हमेशा के लिए रखना हो तो उसे डीवीआर से डाटा केबल के जरिए किसी दूसरी जगह ट्रांसफर किया जा सकता है। – इस तरह का सेटअप लगाने का खर्च अमूमन 22-24 हजार रुपए होता है।

ऑफिस/दुकान : – ऑफिस में अमूमन भीतर डोम कैमरे और एंट्रेंस पर बुलेट कैमरे का सेटअप लगता है। – दुकान में कैमरों का सेटअप जरूरत के हिसाब से लगाया जा सकता है। मिसाल के तौर पर अगर कीमती सामान की दुकान है, तो भीतर भी हाई रेजॉल्युशन बुलेट कैमरे लगवाए जा सकता हैं। इनसे दुकान के भीतर कस्टमर और स्टाफ की छोटी से छोटी हरकत पर नजर रखी जा सकती है। – मल्टी स्टोरी शॉप में हर स्टोरी पर 1-1 डोम, बॉक्स और बुलेट कैमरे का सेटअप लगवाया जा सकता है। – ऑफिस या दुकान में जरूरत को हिसाब से 20 हजार रुपए से 1 लाख रुपए तक का सेटअप लगवाया जा सकता है।

चलो स्पाई बन जाएं:- दिल्ली के सीएम ने करप्शन से लड़ाई लड़ने के लिए लोगों को छुपे हुए कैमरों के साथ मुस्तैद रहने की सलाह दी है। करप्शन की हर हरकत को रेकॉर्ड करने के बाद उन तक पहुंचाने की मुहिम से करप्शन खत्म होगा या नहीं इस पर लोगों के अलग-अलग विचार हो सकते हैं लेकिन करप्ट लोगों के मन में कैमरे का डर जरूर पैदा करता है। जहां पहले प्रफेशनल जासूस या सिक्यॉरिटी एजेंसी के ट्रेंड लोग ही कैमरे को इस्तेमाल करते थे, अब आम आदमी भी इसकी ताकत को जानने लगा है। आइए चलते हैं स्पाई कैमरों की दुनिया में:

कैसे-कैसे कैमरे:- – स्पाई कैमरों की दुनिया इतनी गहरी है कि किस शक्ल में स्पाई कैमरे से आपका सामना हो जाएगा इसका अंदाजा लगाना बहुत मुश्किल है। – अमूमन स्पाई कैमरे पेन, कैप, बैग, टाई, बटन, मोबाइल, घड़ी और चाबी के गुच्छे की शक्ल में होते हैं। – हाई और लो ऐंड कैमरे मार्केट में मौजूद हैं। ज्यादातर सस्ते कैमरे रेकॉर्ड तो करते हैं लेकिन उनकी क्वॉलिटी इतनी अच्छी नहीं होती कि वह जरूरी तौर पर काम ही आ सके।

– जब भी स्पाई कैम खरीदें, क्वॉलिटी परख कर खरीदें। दुकानदार से डैमो फुटेज दिखाने के लिए भी कह सकते हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि रेकॉर्डिंग की क्वॉलिटी कैसी होगी। – यह भी देख लें कि कैमरे की मेमरी कितनी है। अमूमन कैमरे 4 जीबी की मेमरी के साथ आते हैं, लेकिन जरूरत के हिसाब से ज्यादा मेमरी वाले कैमरे भी मार्केट में मिल सकते हैं। – स्पाई कैमरे की कीमत मार्केट में 250 रुपए से शुरू होकर 10,000 रुपए तक जा सकती है।

समझें इस्तेमाल : – किसी भी तरह के स्पाई कैमरे को इस्तेमाल करने से पहले अपनी जरूरत को समझें। मिसाल के तौर पर टारगेट को कितनी दूर से रेकॉर्ड करना है और किस गतिविधि को रेकॉर्ड करना है। – कैमरे के सेंसर और मेगापिक्सल जितने ज्यादा होंगे रिजल्ट उतने अच्छे होंगे। – ऑपरेट करने से पहले सारे फंक्शन आजमा कर देख लें। किस बटन से क्या होता है इसका पता होना बहुत जरूरी है।

– जिसकी हरकतें रेकॉर्ड करनी हैं, उससे किस एंगल से मुखातिब होंगे इसके बारे में भी सोचना जरूरी है। – प्रफेशनल स्पाई, रेकॉर्डिंग से पहले काफी प्रैक्टिस करते हैं और कीमती मौके को गंवाना नहीं चाहते। अच्छा होगा कि स्पाई कैमरे को आजमाने से पहले रिहर्सल कर लें। – इस बात को अच्छी तरह से समझ लें कि रेकॉर्ड की हुई फुटेज अगर सिस्टम की खामी उजागर करने के लिए है तब तो ठीक है, लेकिन किसी को धमकाने या परेशान करने के लिए की गई रेकॉर्डिंग जेल की हवा खिला सकती है।

कहीं जेल न हो जाए:- – कुछ परिस्थितियों में अपनी सेफ्टी और करप्शन के खिलाफ लड़ाई का हथियार आपकी मुसीबत भी बन सकता है। – अगर सीसीटीवी के जरिए किसी की अंतरंग तस्वीरें या प्राइवेट फुटेज रेकॉर्ड हो जाती हैं और उन्हें पब्लिक कर दिया जाता है तो इस परिस्थिति में आईटीएक्ट 2000 की सेक्शन 66ई के तहत केस बनता है। इसमें तीन साल की सजा और 2 लाख तक जुर्माने का प्रावधान है। – इसके अलावा करप्शन की लड़ाई के नाम पर अगर किसी को धमकाने की ऐक्टिविटी सामने आती है तो आईपीसी में भी केस बनता है।


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मेरे पिछले आर्टिकल में आप जान चुके होंगे की cctv camera क्या होता है ! अलग – अलग जगहों में अलग तरह के camere लगे होते है! आपने बाजार में कई तरह के camere देखे भी  होंगे ! और आपकी इच्छा भी हुई होगी यह जानने की यह  किस तरह के camere होते है! और इनकी क्या खासियत होती है ! इस लेख में मैं आपको cctv camera कितने  प्रकार के होते, उनकी क्या स्पेसिफिकेशन होती है! और अच्छी और बुरी बातें यह सब बताने बाला हूँ ! तो चलिए जानते है कैमरे कितने प्रकार के होते है !

cctv कैमरा कितने प्रकार के होते है

डोम कैमरा

cctv  कैमरा कितने प्रकार के होते हैडोम कैमरा देखने में आधा कटे गेंद के सामान होता है ! यह कैमरा सेलिंग में लगाने के लिए बहुत सही रहता है ! देखने में अच्छा लगता इसे लगाने से आपके घर और ऑफिस के लुक में भी कोई नुक्सान नहीं होता है ! ज्यादा तर यह कैमरा आपको बैंक, ऑफिस, और दुकानों में लगे मिल जायेंगे ! डोम कैमरा भी दो प्रकार का होता है !

नार्मल डोम कैमरा

Normal डोम कैमरा भी दो प्रकार के होते है ! नार्मल DOME CAMERA OR IR DOME CAMERA . इन दोनों में बस इतना फर्क होता है की नार्मल डोम कैमरा रात में फुटेज लेने में सक्षम नहीं होता है ! KIYUNKI इसमें इंफ्रारेड led नहीं होती और IR डोम कैमरा अँधेरे में फुटेज ले सकता है ! नार्मल डोम कैमरे के लिए आपको कम पैसे खरच करने पड़ेंगे नाईट विज़न कैमरा आपको थोड़ा कॉस्टली पड़ेगा ! normal dome कैमरा आपको सभी इन्वायरमेन्ट में लगफग एक सा देखने को मिलेगा ! IR  कैमरा अच्छी क्वेलिटी की फुटेज लेने में ज्यादा सक्षम होता है लेकिन इसमें लाइट का प्रभाब भी ज्यादा पड़ता जैसे low लाइट में यह उतना अच्छा साबित नहीं हो पता ! अगर दोनों में से कोई एक लेना है तो नो डाउट आप IR डोम कैमरा ही लें ! क्यूंकि यह कैमरा नार्मल डोम कैमरा से कंही ज्यादा अच्छा होता है !

cctv कैमरा कितने प्रकार के होते है

वैरी फोकल कैमरा

cctv  कैमरा कितने प्रकार के होते हैजैसा की आप इसके नाम से अंदाजा ला सकते है की यह कैमरा फोकस ko लेकर कुछ खास हो सकता है ! इस कैमरे में आपको ऑप्टिकल ज़ूम की सुभिदा मिलती है ! जिसके द्वारा आप अपने सब्जेक्ट को कैमरे में अच्छे से कवर कर पाएंगे ! और इस कैमरे में आप मैनुअली इसका फोकस भी सेट कर सकते है ! वैरी फोकल कैमरा mein एक और अच्छी बात होती है की इसका lance  बड़ा होता नार्मल कैमरे की तुलना में यानि आप और अच्छी फुटेज ले सकते है !वैरी फोकल भी दो प्रकार का होता है ! IR VERY फोकल कैमरा और वैरी फोकल कैमरा !

बुलेट कैमरा

 

cctv  कैमरा कितने प्रकार के होते है

cctv  कैमरा कितने प्रकार के होते है

बुलेट कैमरा देखने में बेलन या किसी डंडे के टुकड़े के सामान होता है ! यह कैमरा ज्यादा तर आउट डोर यूज़ होता है aapne किसी ऑफिस के बहार, टोल गेट  चुराहे में, पार्किंग एरिया में जरूर देखा होगा यह कैमरा आउटडोर में अच्छे से काम करता है इसकी क्वेलिटी kaafi अछि होती है ! यह कैमरे भी दो प्रकार के होते पर आपको दोनों ही जगह नाईट विज़न मिलते है यह एक अच्छी बात है ! इसमें आपको एक नार्मल बुलेट कैमरा और एक वैरी फोकल  बुलेट कैमरा मिलेगा !

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बॉक्स टाइप कैमरे

यह कैमरा कुछ हद tak देखने में बुलेट कैमरे की तरह दिखता है पर यह कैमरा थोड़ा चपटा होता है बॉक्स की तरह दीखता है ! इस कैमरे में आपको Lance अलग मिलता है किसी DSLR कैमरे की तरह !इस camere के OUTPUT के लिए पीसीबी के साथ ही BNC और पावर पिन कनेक्टर जुड़े रहते है ! इन कमेरो का लेंस kaafi बड़ा होता है जिसकी बजह से यह kaafi अच्छी फुटेज लेने में सक्षम होते है ! यह कैमरे आपको नाईट विज़न के साथ नहीं मिलते है ! आपको इस तरह ke कैमरे अक्सर बहुत kam देखने को मिलेंगे !

PTZ कैमरा

cctv  कैमरा कितने प्रकार के होते हैPTZ कैमरा इसके फुल फोरम से मालूम हो जाता है की यह किस तरह का कैमरा हो सकता है ! P – PAN , T – TILT , Z – ZOME  यानि आप इसे रिमोटली इसकी डायरेक्शन CONTROL कर सकते है आप जिस एरिआ में फोकस करना चाहते है आप उस एरियापर फोकस कर सकते है!  इस कैमरे को रोटेट करवा सकते है क्यूंकि यह कैमरा दाएं बाएं और ऊपर निचे घूमता रहता है ! इसकी एक और खास बात यह भी होती है की यह किसी ek सब्जेक्ट पर फोकस कर सकता है जिस प्रकार कोई सब्जेक्ट मूव करेगा आपका कैमरा भी सब्जेक्ट के साथ मूव होता रहेगा ! यह कैमरा थोड़ा सभी cameron से ज्यादा कॉस्टली होता है ! ये कैमरा आपको बड़े गोदामों , चुराहे या किसी चौक पर देखने को मिल सकते है  !

पिन होल कैमरा

cctv  कैमरा कितने प्रकार के होते हैइस कैमरे को आप हिडन कैमरे के नाम से जानते होंगे ! अपने नाम के सबरूप यह देखने में kaafi छोटा होता है ! यह ऐसी जगह इस्तेमाल होता है जंहा किसी को पता न चले की yanh पर कैमरा लगा है ! इसके द्वारा ली गयी फुटेज अच्छी होती पर बहुत ज्याद अच्छी नहीं ! इस कैमरे के इस्तेमॉल दोनों अच्छे or बुरे कामो के लिए लोग करते कुछ जगह यह कैमरा करपशन का पर्दाफाश करता है !तो कुछ जगह इंसानियत को शर्मशार भी करता है! क्यूंकि इस दुनिया में बहुत से ऐसे लोग है जो इस कैमरे का इस्तेमाल गलत चीजों के लिए करते है जो की kabhi नहीं होना चाहिए !

IP CAMERA

यह कैमरा इंटरनेट प्रोटोकॉल पर आधारित होता है !क्वेलिटी के मामले में यह कैमरे सबसे अच्छा होता ही है साथ में फ्रीडम भी देता है !क्यूंकि इस कैमरे को आप अपने लैपटॉप कंप्यूटर के साथ डिरेक्टली लगा के USE  कर सकते

सीसीटीवी कैमरा क्या है और कितने प्रकार की होती है?

सीसीटीवी कैमरा सावधानी एवं सुरक्षा के तौर पर इस्तेमाल किया जाने वाला एक उपकरण होता है जिसका पूरा नाम होता है क्लोज सर्किट टीवी, जो किसी भी कैमरे से रिकॉर्ड हुई किसी भी चीज को देखने के लिए एक सर्किट के जरिये दर्शक तक पहुँचाया जाता है।

सीसीटीवी कैमरे के प्रकार (Types of CCTV)

हिडेन कैमरा (Hidden Camera)

यह बॉक्स की तरह होता है। इसमें एक छोर पर लेंस के साथ आयताकार यूनिट होता है। इसका इस्तेमाल रिटेल दुकानों में ज्यादा किया जाता है। बॉक्स होने के कारण सुरक्षा कि दृष्टि से इसका इस्तेमाल ज्यादा होता है।

आईटी कैमरा (IT Camera)

यह डिजिटल कैमरा होता है। इसकी गुणवत्ता अन्य  एनालॉग कैमरा से 20 गुना ज्यादा होता है। इसका इस्तेमाल सभी जगहों पर होता है।

बुलेट कैमरा (Bullet Camera)

यह कैमरा ट्यूब की तरह होता है। इसमें सिल्वर या एल्युमिनियम शेप के कवर में लेंस होता है। इससे रिकॉर्डिंग यूनिट जुड़ा होता है। छोटा आकर होने के कारण इसे आसानी से बहार के दीवारों में लगाया जा सकता है। इसमें खासियत यह है की यह अँधेरे में भी रिकॉर्डिंग कर सकता है।

डोम कैमरा (Dome Camera)

इस तरह का कैमरा आसानी से घरों में लगाया जा सकता है। वर्तमान में अधिकतर लोग इसका ही इस्तेमाल करते है। जल्दी यह सबकी नजर में भी नहीं आता है।

पीटीजेड कैमरा (PTZ Camera)

पेन टिल्ड जूम स्टाइल के कैमरे सर्विलांस के वक्त घुमाए जा सकते है साथ ही ऑब्जेक्ट पर जूम भी किया जा सकता है।  इसके साथ जूम दूर तक कर देख सकते है। इसके साथ जूम और कंट्रोल पेनल भी साथ में रहता है। यह भीड़-भाड़ वाले इलाके जैसे बड़े स्टोर, चौक-चौराहे आदि में किया जाता है।

इंफ्रारेड कैमरा (Infrared Camera)

इस कैमरे के चरों ओर इंफ्रारेड एलईडी लगा होता है जो एक बीग की शक्ल में लाइट छोड़ता है। इससे कम रौशनी में भी तस्वीर रिकॉर्ड हो जाता है। यह रात के लिए खास होता है।

डिस्क्रीट कैमरा (Discrete Camera) 

यह स्मॉक डिटेक्टर की तरह होता है। यह सभी जगह के व्यू को कवर करता है। इसमें स्मॉक डिटेक्टर भी रहता है जो खास कर हाई प्रोफाइल जगहों पर इसका इस्तेमाल होता है।

360 डिग्री विजन कैमरा (360 Degree Vision Camera)

यह चारों तरफ एक घूमता है। सभी जगहों के व्यू को कवर करता है। इसमें स्मॉक डोटेक्टर भी रहता है जो खास कर हाई प्रोफाइल जगहों पर इसका इस्तेमाल होता है

आप सीसीटीवी कैमरे और उनके फंक्शनैलिटीज के बारे में जानते है? इस सरल गाइड से अधिक जानें

यह इस आधुनिक युग में सिक्युरिटी को गंभीरता से लेने के लिए आवश्यकता है। सिक्युरिटी की CCTV_Camera_User_Guideजरूरत सिर्फ बिज़नेस और कमर्शियल के लिए नहीं है, बल्कि यह हमारे घर के लिए भी है| आम जगहों पर अपराध और चोरी के बढ़ने के साथ ही, यह बहुत महत्वपूर्ण हो गया है की आप सिक्युरिटी ऑप्शंस के बारे में विचार करें|
घर और काम के स्थान पर सुरक्षा प्रदान करने का सबसे लोकप्रिय और प्रभावी तरीका है सीसीटीवी कैमरा| सीसीटीवी कैमरें चोरों के लिए एक बहुत ही सफल प्रतिबंध के रूप में कार्य कर सकते हैं, या निश्चित रूप से वे चोरो को कम से कम दो बार तो सोचने पर मजबूर करते है। इन दिनों सिक्युरिटी इक्विपमेंट के पीछे की टेक्नोलॉजी अविश्वसनीय रूप से उन्नत हो गयी है और फुटेज को साधारण टीवी या कंप्यूटर भी देखा जा सकता है|
 
 
सीसीटीवी कैमेरा क्या है?
अधिकांश लोगों को लगता है की सीसीटीवी को समझना कुछ मुश्किल है, इसके अलावा कई लोगों को यह भी पता नहीं है सीसीटीवी कैसे काम करता है … तो वास्तव में क्लोज सर्किट टेलीविजन क्या है?
क्लोज सर्किट टेलीविजन (सीसीटीवी) इसे वीडिओ सर्वेलन्स के रूप में जाना है| यह एक क्लोज सर्किट सिस्टम है और इसमें सभी एलिमेंट्स सीधे जुड़े हुए हैं। सीसीटीवी सिक्युरिटी कैमेरों के द्वारा रिकॉर्ड किए गए पिक्चर या वीडिओ को प्रसारित नहीं किया जाता| इसके बजाय, वीडियो को DVR (डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर) या NVR (नेटवर्क वीडियो रिकॉर्डर) पर रिकॉर्ड किए जाते है।
 
सीसीटीवी इक्विपमेंट, वीडियो लगातार रिकॉर्ड कर सकते हैं या किसी विशेष घटना या दिन के कुछ समय में नजर रखने के लिए इन्हे प्रोग्राम किया जाता हैं। वीडियो को विशिष्ट समय की अवधि के लिए गुणवत्ता के विभिन्न स्तरों पर स्टोर किया जा सकता है और युजर वापस जाकर पुराने वीडियो की जांच कर सकते हैं|
 
 
हिस्ट्री:
सीसीटीवी को वास्तव में एक रॉकेट के लॉन्चिंग का निरीक्षण करने के लिए जर्मनी में वर्ष 1942 में पहली बार इस्तेमाल किया गया था। बाद में सीसीटीवी सिक्युरिटी कैमरे बैंकों और कैसीनो में सुरक्षा के लिए लोकप्रिय हो गये, लेकिन आज वे रिटेल बिज़नेस, एयरपोर्ट्स, रेस्टोरेंट्स, ट्रैफिक मॉनिटरिंग और अन्य इंस्टीट्यूशन मुख्य रूप से अपने ग्राहकों की सुरक्षा के लिए निगरानी रखने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। बहरहाल, आज जब वे इस्तेमाल के लिए सरल और काफी सस्ते हो गये है, तो इन्हे घर की सुरक्षा के लिए भी इस्तेमाल किया जाने लगा है।
 
 
आप को सिक्युरिटी कैमरा के किस प्रकार का उपयोग करना चाहिए?
कैमरों की एक विस्तृत विविधता वीडियो निगरानी उद्देश्यों के लिए मार्केट में आज उपलब्ध हैं। इनके विभिन्न फीचर्स, स्टाइल्स और ऑप्शंस होते है और आपको इनडोअर या आउटडोअर, दिन या रात, या दोनों के दौरान, ऐसे कई फैक्टर्स पर निर्भर सही सीसीटीवी सिक्युरिटी कैमरा का पता लगाना है|
 
सीसीटीवी कैमरा के प्रकार:
1) डोम सीसीटीवी कैमरा:
Dome Cameraडोम सीसीटीवी कैमरा सबसे आम तौर पर घर के अंदर सुरक्षा और निगरानी के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। कैमरा यूनिट एक पारदर्शी डोम के अंदर माउंटेड होता है और वे दोनों सीलिंग माउंटेड या छत पर ब्रैकेट में फिट किए जाते है, जो फील्ड व्यू और ऐप्लीकेशन की आवश्यकता पर निर्भर होता है| डोम कैमरे आमतौर पर घरों, कैसीनो, रिटेल स्टोर और रेस्तरां के अंदर निगरानी प्रणाली में इस्तेमाल किया जाता है। उनका डोमे का आकार यह बताना मुश्किल कर देता है की कैमरा किस दिशा में है| डोम कैमरे अलग अलग डिप्लॉइमन्ट के लिए मिनी और माइक्रो वर्जन में उपलब्ध हैं और विभिन्न आर्किटेक्चरल स्टाइल्स को सूट करने के लिए कई हाउज़िंग रेंज में उपलब्ध हैं|
डोम कैमरे, टाइप की एक विस्तृत विविधता में आते हैं। प्रत्येक डोम सिक्युरिटी कैमरा का प्रकार यूनिक फीचर्स और फंक्शन प्रदान करता है| एक से अधिक डिस्क्राइब्ड फीचर्स प्रदान करने वाले कैमरो का चयन करना भी संभव है|
 
a) इनडोर और आउटडोर सीसीटीवी कैमरा:
आम तौर पर सभी आउटडोर कैमरों को घर के अंदर भी इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन सभी इनडोर कैमरों को आउटडोर के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। जिन्हे सिर्फ घर कें अंदर की सिक्युरिटी की जरूरत है, उन लोगों के लिए इनडोर कैमरा एकदम सही हैं| आउटडोर डोम कैमरा विशेष मटेरियल से मिलकर बनाता है, ताकी वे मौसम और तापमान का सामना कर सकें| आउटडोर डोम सिक्युरिटी कैमरें वेदरप्रूफ होते है वे हर मौसम और तापमान का सामना कर सकते हैं।
 
b) इन्फ्रारेड डोम सीसीटीवी कैमरा:
Infrared Dome Camerasइन्फ्रारेड कैमरों को अक्सर “नाइट विजन” कैमरा कहा जाता है क्योंकि वे रात में देख सकते है| इन्फ्रारेड कैमरे दिन के दौरान हाइ रेजोल्यूशन कलर वीडियों रिकॉर्ड करते है| इनमें आईआर लाइट एमिटिंग डाइओड या एलइडी कि सिरीज होती है, जो कैमेरा को इन्फ्रारेड मोड में स्विच करता है जिससे वे संपूर्ण अंधेरे में भी देख सकते है| इन्फ्रारेड मोड में यह कैमरा ब्लैक एंड वाइट इमेज कैप्चर करता है| लेकिन इन्फ्रारेड कैमेरे को जादा पावर की आवश्यकता होती है|
लेकिन आप “नाइट विजन” और “डे / नाइट कैमरा” में कंफ्यूज न हो| डे/नाइट कैमेरा में इन्फ्रारेड लाइट नहीं होती|
 
c) डे / नाइट डोम कैमरे:
Day Night Dome Camerasअधिकांश सीसीटीवी डोम कैमरें डे/नाइट कैमेरा होते है, जिनमें एक अतिरिक्त संवेदनशील इमेजिंग चिप होती है जो बिना इन्फ्रारेड लाइट के कम रोशनी में भी अच्छी इमेज कैप्चर कर सकते है| इसका अच्छा उदाहरण यह है कि बाहरी सड़क की कम रोशनी| इस बात का ध्यान रखें कि, यह कैमेरे बिना इन्फ्रारेड लाइट के होते है और इसलिए वे पूरे अंधेरे में इमेज कैप्चर नही कर सकते|
 
 
 
d) वैन्डल रेजिस्टेंस सीसीटीवी कैमेरा:
Vandal Resistance Cameraवैन्डल रेजिस्टेंस सीसीटीवी कैमेरा का कवर बहुत मजबूत वैन्डल प्रूफ कांच या प्लास्टिक से बना होता है, जो कैमेरा को किसी भी तबाही से बचाता है| ऐसे कैमेरों को उन एरिया में इसमेमाल किया जाता है, जहां लोगों सें कैमरों को नुकसान करने की कोशिश हो सकती है| इन कैमरों को जेलों या अन्य उच्च यातायात के क्षेत्रों पर नजर रखने के लिए इस्तेमाल किया जाता है|
 
 
 
ई) PTZ (पैन-टिल्ट- ज़ूम):
PAN Tilt Zoom Camerasपैन-टिल्ट- ज़ूम या PTZ, कैमरों को रिमोटली ऊपर या नीचे, बाएं या दाएं घूमा सकते है और इन्हे ज़ूम इन और ज़ूम आउट कर सकते है| इन मूवमेंट की क्षमता से PTZ कैमेरे स्थिर दो या दो से अधिक कैमरों की जगह ले सकते है| इन कैमेरों में अक्सर आटोमेटिक ऑब्जेक्ट ट्रैकिंग का फीचर होता है| इसका मतलब है यह कैमेरा मोशन का पता लगने पर ज़ूम इन होता है और मोशन ऑब्जेक्ट को फालो करता है| PTZ सीसीटीवी कैमरें आकार में बड़े होते है और इनकी देखने की क्षमता 360 डिग्री होती हैं। इनमें लेंस का आकार भी बड़ा होता है जो पूरे क्षेत्र को कवर करके स्कैन कर सकता है और इसके साथ ही कैमरों की संख्या को जरूरत सें कम कर देता है|
 
2) आईपी (इंटरनेट प्रोटोकॉल):
IP Camerasइंटरनेट प्रोटोकॉल (आईपी) कैमेरा एक वेबकैम होता है जिसें निगरानी के लिए इस्तेमाल किया जाता है| आईपी कैमेरें को बिना किसी अन्य डिवाइस के सीधे इंटरनेट या नेटवर्क को कनेक्ट किया जा सकता है| इन कैमेरें को इंटरनेट से नेक्ट करके युजर अपने घर, ऑफिस या दुनिया में कही भी ब्रॉडबैंड इंटरनेट कनेक्शन की मदद से इस कैमेरे की निगरानी के एरिया को देख सकते है| लेकिन इसके लिए आपको इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर से आईपी खरीदना पडेगा और इसे कैमेरे में कॉंफिगर करना होगा| इस आईपी से आप कही भी कैमेरे को एक्सेस कर सकते है|
गैर आईपी कैमरों आमतौर पर एक डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर से कनेक्ट होते है। वे सीधे इंटरनेट सें कनेक्ट नहीं होते, लेकिन डीवीआर से वे इंटरनेट सें कनेक्ट हो सकते है।
 
3) बुलेट कैमरा
Bullet Camerasबुलेट कैमरा को एक ढाँचे में रखा जाता है, जो आम तोर पर एक बुलेट की तरह एक लंबे सिलेंडर के आकार का होता है| यह ढाँचा कैमेरा को मौसम की सभी प्रकार की स्थिति जैसे धूल, मिट्टी, बारिश, ओंलें और अन्य हानिकारक तत्वों से कैमरा की सुरक्षा करता है।
यह कैमेरें आउटडोर उपयोग के लिए आदर्श होते हैं, विशेष रूप सें लंबी दूरी पर नजर रखने के लिए| इसका माउन्टिंग ब्रैकेट इस कैमेरें को वांछित दिशा पर नजर रखने के लिए सक्षम बनाता बनाता है| इन्हे रेजिडेंशियल प्लेसेस के साथ कमर्शियल प्लेसेस पर इस्तेमाल किया जाता है।
बुलेट कैमरा विभिन्न आकार और क्षमता के साथ आते है| इनमें से कुछ कैमेरें में मैनुअल ज़ूम लेंस और हाई रेंजे कैपेसिटी हो सकती है। इनमें आम तौर पर ऑटोमेटिक बैकलाइट कंपनसेशन फीचर होता है जो कैमेरा के इलेक्ट्रॉनिक शटर को ऑटोमेटिक एडजस्ट करता है, जिससें कंट्रास्टिंग लाइट में भी देखा जा सकता है| इन्हे सीलिंग या वाल पर इंस्टॉल किया जा सकता है और इनके लिए पावर एडेप्टर की आवश्यकता होती है।
 
 
4) सी-माउंट कैमरा
C-Mount Camerasसी माउंट असल में एक लेंस का प्रकार है जीसे सामान्यतः 16mm फिल्म कैमरों और क्लोज सर्किट टीवी कैमरों में पाया जाता है| सी माउंट कैमरा का एडवांटेज यह है की इसका लेंस बदला जा सकता है| अगर आप को 35 या 40 फुट की दुरी से चेहरा देखना है तो आपको एक विशेष लेंस के साथ सी-माउंट कैमरा की आवश्यकता है| सी-माउंट लेंस 4mm से 100mm तक उपलब्ध है| 4mm लेंस के साथ आप 70 डिग्री के कोण के व्यूइंग एंगल में 35 फिट तक की दूरी का चेहरा देख सकते है| इन्हे एक छोटे ऑफिस या घर पर इस्तेमाल किया जाता सकता है|
हर एक प्रकार का आईपी ​​कैमरा विशिष्ट उद्देश्य के लिए आइडियल होता है। उदाहरण के लिए, डोम आईपी कैमरा आउटडोर उपयोग के लिए, जब कि PTZ आईपी कैमरा सबसे अच्छा व्यूइंग एंगल देता है और आईपी कैमरा इन्फ्रारेड लाइट से लैस होता है जो रात के समय में निगरानी रख सकते है| इसलिए यह महत्वपूर्ण है की कैमेरा खरीदने से पहले नेटवर्क सिक्युरिटी कैमेरों के विभिन्न प्रकार का पता होना चाहिएं|
 
घर या ऑफिस में सिक्युरिटी कैमेरा को कैसे इंस्टॉल करें?
सुरक्षा के लिए कैमेरा के द्वारा निगरानी रखना अब सभी होम या कमर्शियल जगहों के लिए अत्याव्यश्यक बनाता जा रहा है और अब युजर को आम ख़तरे, कस्टमाइजेशन ऑप्शंस और पूरी तरह से डिजिटल प्रणाली के फायदे को समझना महत्वपूर्ण है।
एक सफल सीसीटीवी सर्वेलन्स सिस्टम को लागू करने के लिए सिक्युरिटी प्रोफेशनल्स के लिए यहाँ कुछ कदम हैं|
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1) प्लानिंग:
सबसे पहाला स्टेप्स यही है की आपकी जरूरत के हिसाब सें सर्वेलन्स सिस्टम का एक डायग्राम बना लें| घर या ऑफिस के लिए आप एक रूप-रेखा तैयार कर लें| आप किस एरिया पर सबसे जादा नजर रखना चाहतें है उसे प्राथमिकता दें और उसके बाद कैमरों की जगह का फैसला लें| जब आप कैमरा की लोकेशन का प्लान कर रहे हो तब लाइट की कंडीशन के बारें में विचार करें और यह सुनिश्चित करें की कैमेरे व्यू के बिच में कोई चिज ना आए और कैमेरा अपना बेस्ट व्यू दे पांए|
 
2) सीसीटीवी कैमरा का चयन:
आज मार्केट में कई सीसीटीवी कैमरे उपलब्ध हैं और आपकी स्थिति के लिए सबसे अच्छा कौन सा कैमेरा काम करेगा यह तय करना महत्वपूर्ण है।
कैमेरा खरीदने से पहले, यह कैमेरें किस तरह इस्तेमाल किया जाएगां, इसके लिए बजट कितना यह समझना आपके लिए महत्वपूर्ण है।
 
3) इक्विपमेंट्स की जरूरत:
इससे पहले कि आप सीसीटीवी कैमरे इंस्टॉल करें, इनके लिए उचित कौनसे इक्विपमेंट्स होने चाहिए इसका ज्ञान होना आवश्यक है| जब आप कैमरा खरीदने जाएं तब इसके साथ कौनसे आइटम शामिल हैं यह देखें|सर्विलांस सिस्टम में मुख्य रूप सें सीसीटीवी कैमेरें, डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर (डीवीआर), पावर सप्लाइ, केबल और मॉनिटर होते है| डीवीआर रिकॉर्डिंग को स्टोर करता है और उसके आउटपूट को टीवी या मॉनिटर पर दिखाता हैं| डीवीआर खरीदने से पहले आपको इस बात का ध्यान रखना होगा की इस डीवीआर को कितने कैमेरें कनेक्ट करने वाले हैं| आमतौर पर डीवीआर 1, 4, 8 और 16 कैमरे चैनल में आता है। इसलिए अगर आप 4 कैमेरे लगाना जा रहे है तो 4 चैनल का डीवीआर ले सकते है, लेकिन भविष्य में अगर विस्तार का प्लान है तो कैमरा कि संख्या से जादा चैनल का डीवीआर लें| इसमें 1 टीबी क्षमता की हार्ड डिस्क लगा लें, जो ३० दिनों तक की रिकॉर्डिंग स्टोर कर सकती हैं|
 
4) इंस्टॉलेशन लोकेशन को सिलेक्ट करें:
जब कैमेरों के लिए सभी इक्विपमेंट्स आपके के हाथ में हों, तब अलगा कदम है कैमेरों की इंस्टॉलेशन कि जगह|
आउटडोर कैमेर के लिए दीवार जहां छत से मिलती है वह स्थान आदर्श हैं| इनडोर कैमेरे आप जितने एरिया को कवर करना चाहतें है वह कवर हो जाएं ऐसे जगह इंस्टॉल करें|इसके साथ ही आप डीवीआर और डिस्प्ले मॉनिटर कि जगह भी सुनिश्चित कर लें| क्योकी सभी कैमेरों की केबल इस डीवीआर तक आएगी|
 
5) वायरिंग कि सेटिंग करें:
वाल और सिलिंग्स और फ्लोर्स के बीच होल ड्रिलिंग करके और केबल बिछाकें केबलींग करें|
 
6) कैमरा लगाएं:
सिक्युरिटी कैमेरों के अलग अलग मॉडल के लिए उनका इंस्टॉलेशन का तरिका भी भिन्न होता है, इसलिए यही अच्छा होगा की आप मैन्युफैक्चरर के इंस्ट्रक्शंस का पालन करें|
 
7) सभी कंपोनेंट्स को कनेक्ट करें:
कैमेरों के इंस्टॉलेशन के बाद अगला कदम है सर्विलांस सिस्टम के सभी कंपोनेंट्स को कनेक्ट करें| सभी कैमेरों को पहले डीवीआर को कनेक्ट करें, बाद में पावर कनेक्टर लगाएं|
 
8) सिस्टम को कॉन्फ़िगर:
सर्विलांस सिस्टम कंप्यूटर के साथ काम करने के लिए एक सरल प्रक्रिया है। एक बार सिस्टम कनेक्ट और पावर आन हो जाएं, कंप्यूटर पर कैमेरे का सॉफ्टवेयर इंन्स्टॉल करें|

आप सीसीटीवी कैमरे और उनके फंक्शनैलिटीज के बारे में जानते है? इस सरल गाइड से अधिक जानें

यह इस आधुनिक युग में सिक्युरिटी को गंभीरता से लेने के लिए आवश्यकता है। सिक्युरिटी की CCTV_Camera_User_Guideजरूरत सिर्फ बिज़नेस और कमर्शियल के लिए नहीं है, बल्कि यह हमारे घर के लिए भी है| आम जगहों पर अपराध और चोरी के बढ़ने के साथ ही, यह बहुत महत्वपूर्ण हो गया है की आप सिक्युरिटी ऑप्शंस के बारे में विचार करें|
घर और काम के स्थान पर सुरक्षा प्रदान करने का सबसे लोकप्रिय और प्रभावी तरीका है सीसीटीवी कैमरा| सीसीटीवी कैमरें चोरों के लिए एक बहुत ही सफल प्रतिबंध के रूप में कार्य कर सकते हैं, या निश्चित रूप से वे चोरो को कम से कम दो बार तो सोचने पर मजबूर करते है। इन दिनों सिक्युरिटी इक्विपमेंट के पीछे की टेक्नोलॉजी अविश्वसनीय रूप से उन्नत हो गयी है और फुटेज को साधारण टीवी या कंप्यूटर भी देखा जा सकता है|
 
 
सीसीटीवी कैमेरा क्या है?
अधिकांश लोगों को लगता है की सीसीटीवी को समझना कुछ मुश्किल है, इसके अलावा कई लोगों को यह भी पता नहीं है सीसीटीवी कैसे काम करता है … तो वास्तव में क्लोज सर्किट टेलीविजन क्या है?
क्लोज सर्किट टेलीविजन (सीसीटीवी) इसे वीडिओ सर्वेलन्स के रूप में जाना है| यह एक क्लोज सर्किट सिस्टम है और इसमें सभी एलिमेंट्स सीधे जुड़े हुए हैं। सीसीटीवी सिक्युरिटी कैमेरों के द्वारा रिकॉर्ड किए गए पिक्चर या वीडिओ को प्रसारित नहीं किया जाता| इसके बजाय, वीडियो को DVR (डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर) या NVR (नेटवर्क वीडियो रिकॉर्डर) पर रिकॉर्ड किए जाते है।
 
सीसीटीवी इक्विपमेंट, वीडियो लगातार रिकॉर्ड कर सकते हैं या किसी विशेष घटना या दिन के कुछ समय में नजर रखने के लिए इन्हे प्रोग्राम किया जाता हैं। वीडियो को विशिष्ट समय की अवधि के लिए गुणवत्ता के विभिन्न स्तरों पर स्टोर किया जा सकता है और युजर वापस जाकर पुराने वीडियो की जांच कर सकते हैं|
 
 
हिस्ट्री:
सीसीटीवी को वास्तव में एक रॉकेट के लॉन्चिंग का निरीक्षण करने के लिए जर्मनी में वर्ष 1942 में पहली बार इस्तेमाल किया गया था। बाद में सीसीटीवी सिक्युरिटी कैमरे बैंकों और कैसीनो में सुरक्षा के लिए लोकप्रिय हो गये, लेकिन आज वे रिटेल बिज़नेस, एयरपोर्ट्स, रेस्टोरेंट्स, ट्रैफिक मॉनिटरिंग और अन्य इंस्टीट्यूशन मुख्य रूप से अपने ग्राहकों की सुरक्षा के लिए निगरानी रखने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। बहरहाल, आज जब वे इस्तेमाल के लिए सरल और काफी सस्ते हो गये है, तो इन्हे घर की सुरक्षा के लिए भी इस्तेमाल किया जाने लगा है।
 
 
आप को सिक्युरिटी कैमरा के किस प्रकार का उपयोग करना चाहिए?
कैमरों की एक विस्तृत विविधता वीडियो निगरानी उद्देश्यों के लिए मार्केट में आज उपलब्ध हैं। इनके विभिन्न फीचर्स, स्टाइल्स और ऑप्शंस होते है और आपको इनडोअर या आउटडोअर, दिन या रात, या दोनों के दौरान, ऐसे कई फैक्टर्स पर निर्भर सही सीसीटीवी सिक्युरिटी कैमरा का पता लगाना है|
 
सीसीटीवी कैमरा के प्रकार:
1) डोम सीसीटीवी कैमरा:
Dome Cameraडोम सीसीटीवी कैमरा सबसे आम तौर पर घर के अंदर सुरक्षा और निगरानी के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। कैमरा यूनिट एक पारदर्शी डोम के अंदर माउंटेड होता है और वे दोनों सीलिंग माउंटेड या छत पर ब्रैकेट में फिट किए जाते है, जो फील्ड व्यू और ऐप्लीकेशन की आवश्यकता पर निर्भर होता है| डोम कैमरे आमतौर पर घरों, कैसीनो, रिटेल स्टोर और रेस्तरां के अंदर निगरानी प्रणाली में इस्तेमाल किया जाता है। उनका डोमे का आकार यह बताना मुश्किल कर देता है की कैमरा किस दिशा में है| डोम कैमरे अलग अलग डिप्लॉइमन्ट के लिए मिनी और माइक्रो वर्जन में उपलब्ध हैं और विभिन्न आर्किटेक्चरल स्टाइल्स को सूट करने के लिए कई हाउज़िंग रेंज में उपलब्ध हैं|
डोम कैमरे, टाइप की एक विस्तृत विविधता में आते हैं। प्रत्येक डोम सिक्युरिटी कैमरा का प्रकार यूनिक फीचर्स और फंक्शन प्रदान करता है| एक से अधिक डिस्क्राइब्ड फीचर्स प्रदान करने वाले कैमरो का चयन करना भी संभव है|
 
a) इनडोर और आउटडोर सीसीटीवी कैमरा:
आम तौर पर सभी आउटडोर कैमरों को घर के अंदर भी इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन सभी इनडोर कैमरों को आउटडोर के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। जिन्हे सिर्फ घर कें अंदर की सिक्युरिटी की जरूरत है, उन लोगों के लिए इनडोर कैमरा एकदम सही हैं| आउटडोर डोम कैमरा विशेष मटेरियल से मिलकर बनाता है, ताकी वे मौसम और तापमान का सामना कर सकें| आउटडोर डोम सिक्युरिटी कैमरें वेदरप्रूफ होते है वे हर मौसम और तापमान का सामना कर सकते हैं।
 
b) इन्फ्रारेड डोम सीसीटीवी कैमरा:
Infrared Dome Camerasइन्फ्रारेड कैमरों को अक्सर “नाइट विजन” कैमरा कहा जाता है क्योंकि वे रात में देख सकते है| इन्फ्रारेड कैमरे दिन के दौरान हाइ रेजोल्यूशन कलर वीडियों रिकॉर्ड करते है| इनमें आईआर लाइट एमिटिंग डाइओड या एलइडी कि सिरीज होती है, जो कैमेरा को इन्फ्रारेड मोड में स्विच करता है जिससे वे संपूर्ण अंधेरे में भी देख सकते है| इन्फ्रारेड मोड में यह कैमरा ब्लैक एंड वाइट इमेज कैप्चर करता है| लेकिन इन्फ्रारेड कैमेरे को जादा पावर की आवश्यकता होती है|
लेकिन आप “नाइट विजन” और “डे / नाइट कैमरा” में कंफ्यूज न हो| डे/नाइट कैमेरा में इन्फ्रारेड लाइट नहीं होती|
 
c) डे / नाइट डोम कैमरे:
Day Night Dome Camerasअधिकांश सीसीटीवी डोम कैमरें डे/नाइट कैमेरा होते है, जिनमें एक अतिरिक्त संवेदनशील इमेजिंग चिप होती है जो बिना इन्फ्रारेड लाइट के कम रोशनी में भी अच्छी इमेज कैप्चर कर सकते है| इसका अच्छा उदाहरण यह है कि बाहरी सड़क की कम रोशनी| इस बात का ध्यान रखें कि, यह कैमेरे बिना इन्फ्रारेड लाइट के होते है और इसलिए वे पूरे अंधेरे में इमेज कैप्चर नही कर सकते|
 
 
 
d) वैन्डल रेजिस्टेंस सीसीटीवी कैमेरा:
Vandal Resistance Cameraवैन्डल रेजिस्टेंस सीसीटीवी कैमेरा का कवर बहुत मजबूत वैन्डल प्रूफ कांच या प्लास्टिक से बना होता है, जो कैमेरा को किसी भी तबाही से बचाता है| ऐसे कैमेरों को उन एरिया में इसमेमाल किया जाता है, जहां लोगों सें कैमरों को नुकसान करने की कोशिश हो सकती है| इन कैमरों को जेलों या अन्य उच्च यातायात के क्षेत्रों पर नजर रखने के लिए इस्तेमाल किया जाता है|
 
 
 
ई) PTZ (पैन-टिल्ट- ज़ूम):
PAN Tilt Zoom Camerasपैन-टिल्ट- ज़ूम या PTZ, कैमरों को रिमोटली ऊपर या नीचे, बाएं या दाएं घूमा सकते है और इन्हे ज़ूम इन और ज़ूम आउट कर सकते है| इन मूवमेंट की क्षमता से PTZ कैमेरे स्थिर दो या दो से अधिक कैमरों की जगह ले सकते है| इन कैमेरों में अक्सर आटोमेटिक ऑब्जेक्ट ट्रैकिंग का फीचर होता है| इसका मतलब है यह कैमेरा मोशन का पता लगने पर ज़ूम इन होता है और मोशन ऑब्जेक्ट को फालो करता है| PTZ सीसीटीवी कैमरें आकार में बड़े होते है और इनकी देखने की क्षमता 360 डिग्री होती हैं। इनमें लेंस का आकार भी बड़ा होता है जो पूरे क्षेत्र को कवर करके स्कैन कर सकता है और इसके साथ ही कैमरों की संख्या को जरूरत सें कम कर देता है|
 
2) आईपी (इंटरनेट प्रोटोकॉल):
IP Camerasइंटरनेट प्रोटोकॉल (आईपी) कैमेरा एक वेबकैम होता है जिसें निगरानी के लिए इस्तेमाल किया जाता है| आईपी कैमेरें को बिना किसी अन्य डिवाइस के सीधे इंटरनेट या नेटवर्क को कनेक्ट किया जा सकता है| इन कैमेरें को इंटरनेट से नेक्ट करके युजर अपने घर, ऑफिस या दुनिया में कही भी ब्रॉडबैंड इंटरनेट कनेक्शन की मदद से इस कैमेरे की निगरानी के एरिया को देख सकते है| लेकिन इसके लिए आपको इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर से आईपी खरीदना पडेगा और इसे कैमेरे में कॉंफिगर करना होगा| इस आईपी से आप कही भी कैमेरे को एक्सेस कर सकते है|
गैर आईपी कैमरों आमतौर पर एक डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर से कनेक्ट होते है। वे सीधे इंटरनेट सें कनेक्ट नहीं होते, लेकिन डीवीआर से वे इंटरनेट सें कनेक्ट हो सकते है।
 
3) बुलेट कैमरा
Bullet Camerasबुलेट कैमरा को एक ढाँचे में रखा जाता है, जो आम तोर पर एक बुलेट की तरह एक लंबे सिलेंडर के आकार का होता है| यह ढाँचा कैमेरा को मौसम की सभी प्रकार की स्थिति जैसे धूल, मिट्टी, बारिश, ओंलें और अन्य हानिकारक तत्वों से कैमरा की सुरक्षा करता है।
यह कैमेरें आउटडोर उपयोग के लिए आदर्श होते हैं, विशेष रूप सें लंबी दूरी पर नजर रखने के लिए| इसका माउन्टिंग ब्रैकेट इस कैमेरें को वांछित दिशा पर नजर रखने के लिए सक्षम बनाता बनाता है| इन्हे रेजिडेंशियल प्लेसेस के साथ कमर्शियल प्लेसेस पर इस्तेमाल किया जाता है।
बुलेट कैमरा विभिन्न आकार और क्षमता के साथ आते है| इनमें से कुछ कैमेरें में मैनुअल ज़ूम लेंस और हाई रेंजे कैपेसिटी हो सकती है। इनमें आम तौर पर ऑटोमेटिक बैकलाइट कंपनसेशन फीचर होता है जो कैमेरा के इलेक्ट्रॉनिक शटर को ऑटोमेटिक एडजस्ट करता है, जिससें कंट्रास्टिंग लाइट में भी देखा जा सकता है| इन्हे सीलिंग या वाल पर इंस्टॉल किया जा सकता है और इनके लिए पावर एडेप्टर की आवश्यकता होती है।
 
 
4) सी-माउंट कैमरा
C-Mount Camerasसी माउंट असल में एक लेंस का प्रकार है जीसे सामान्यतः 16mm फिल्म कैमरों और क्लोज सर्किट टीवी कैमरों में पाया जाता है| सी माउंट कैमरा का एडवांटेज यह है की इसका लेंस बदला जा सकता है| अगर आप को 35 या 40 फुट की दुरी से चेहरा देखना है तो आपको एक विशेष लेंस के साथ सी-माउंट कैमरा की आवश्यकता है| सी-माउंट लेंस 4mm से 100mm तक उपलब्ध है| 4mm लेंस के साथ आप 70 डिग्री के कोण के व्यूइंग एंगल में 35 फिट तक की दूरी का चेहरा देख सकते है| इन्हे एक छोटे ऑफिस या घर पर इस्तेमाल किया जाता सकता है|
हर एक प्रकार का आईपी ​​कैमरा विशिष्ट उद्देश्य के लिए आइडियल होता है। उदाहरण के लिए, डोम आईपी कैमरा आउटडोर उपयोग के लिए, जब कि PTZ आईपी कैमरा सबसे अच्छा व्यूइंग एंगल देता है और आईपी कैमरा इन्फ्रारेड लाइट से लैस होता है जो रात के समय में निगरानी रख सकते है| इसलिए यह महत्वपूर्ण है की कैमेरा खरीदने से पहले नेटवर्क सिक्युरिटी कैमेरों के विभिन्न प्रकार का पता होना चाहिएं|
 
घर या ऑफिस में सिक्युरिटी कैमेरा को कैसे इंस्टॉल करें?
सुरक्षा के लिए कैमेरा के द्वारा निगरानी रखना अब सभी होम या कमर्शियल जगहों के लिए अत्याव्यश्यक बनाता जा रहा है और अब युजर को आम ख़तरे, कस्टमाइजेशन ऑप्शंस और पूरी तरह से डिजिटल प्रणाली के फायदे को समझना महत्वपूर्ण है।
एक सफल सीसीटीवी सर्वेलन्स सिस्टम को लागू करने के लिए सिक्युरिटी प्रोफेशनल्स के लिए यहाँ कुछ कदम हैं|
Block_Diagram_CCTV Camera
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
1) प्लानिंग:
सबसे पहाला स्टेप्स यही है की आपकी जरूरत के हिसाब सें सर्वेलन्स सिस्टम का एक डायग्राम बना लें| घर या ऑफिस के लिए आप एक रूप-रेखा तैयार कर लें| आप किस एरिया पर सबसे जादा नजर रखना चाहतें है उसे प्राथमिकता दें और उसके बाद कैमरों की जगह का फैसला लें| जब आप कैमरा की लोकेशन का प्लान कर रहे हो तब लाइट की कंडीशन के बारें में विचार करें और यह सुनिश्चित करें की कैमेरे व्यू के बिच में कोई चिज ना आए और कैमेरा अपना बेस्ट व्यू दे पांए|
 
2) सीसीटीवी कैमरा का चयन:
आज मार्केट में कई सीसीटीवी कैमरे उपलब्ध हैं और आपकी स्थिति के लिए सबसे अच्छा कौन सा कैमेरा काम करेगा यह तय करना महत्वपूर्ण है।
कैमेरा खरीदने से पहले, यह कैमेरें किस तरह इस्तेमाल किया जाएगां, इसके लिए बजट कितना यह समझना आपके लिए महत्वपूर्ण है।
 
3) इक्विपमेंट्स की जरूरत:
इससे पहले कि आप सीसीटीवी कैमरे इंस्टॉल करें, इनके लिए उचित कौनसे इक्विपमेंट्स होने चाहिए इसका ज्ञान होना आवश्यक है| जब आप कैमरा खरीदने जाएं तब इसके साथ कौनसे आइटम शामिल हैं यह देखें|सर्विलांस सिस्टम में मुख्य रूप सें सीसीटीवी कैमेरें, डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर (डीवीआर), पावर सप्लाइ, केबल और मॉनिटर होते है| डीवीआर रिकॉर्डिंग को स्टोर करता है और उसके आउटपूट को टीवी या मॉनिटर पर दिखाता हैं| डीवीआर खरीदने से पहले आपको इस बात का ध्यान रखना होगा की इस डीवीआर को कितने कैमेरें कनेक्ट करने वाले हैं| आमतौर पर डीवीआर 1, 4, 8 और 16 कैमरे चैनल में आता है। इसलिए अगर आप 4 कैमेरे लगाना जा रहे है तो 4 चैनल का डीवीआर ले सकते है, लेकिन भविष्य में अगर विस्तार का प्लान है तो कैमरा कि संख्या से जादा चैनल का डीवीआर लें| इसमें 1 टीबी क्षमता की हार्ड डिस्क लगा लें, जो ३० दिनों तक की रिकॉर्डिंग स्टोर कर सकती हैं|
 
4) इंस्टॉलेशन लोकेशन को सिलेक्ट करें:
जब कैमेरों के लिए सभी इक्विपमेंट्स आपके के हाथ में हों, तब अलगा कदम है कैमेरों की इंस्टॉलेशन कि जगह|
आउटडोर कैमेर के लिए दीवार जहां छत से मिलती है वह स्थान आदर्श हैं| इनडोर कैमेरे आप जितने एरिया को कवर करना चाहतें है वह कवर हो जाएं ऐसे जगह इंस्टॉल करें|इसके साथ ही आप डीवीआर और डिस्प्ले मॉनिटर कि जगह भी सुनिश्चित कर लें| क्योकी सभी कैमेरों की केबल इस डीवीआर तक आएगी|
 
5) वायरिंग कि सेटिंग करें:
वाल और सिलिंग्स और फ्लोर्स के बीच होल ड्रिलिंग करके और केबल बिछाकें केबलींग करें|
 
6) कैमरा लगाएं:
सिक्युरिटी कैमेरों के अलग अलग मॉडल के लिए उनका इंस्टॉलेशन का तरिका भी भिन्न होता है, इसलिए यही अच्छा होगा की आप मैन्युफैक्चरर के इंस्ट्रक्शंस का पालन करें|
 
7) सभी कंपोनेंट्स को कनेक्ट करें:
कैमेरों के इंस्टॉलेशन के बाद अगला कदम है सर्विलांस सिस्टम के सभी कंपोनेंट्स को कनेक्ट करें| सभी कैमेरों को पहले डीवीआर को कनेक्ट करें, बाद में पावर कनेक्टर लगाएं|
 
8) सिस्टम को कॉन्फ़िगर:
सर्विलांस सिस्टम कंप्यूटर के साथ काम करने के लिए एक सरल प्रक्रिया है। एक बार सिस्टम कनेक्ट और पावर आन हो जाएं, कंप्यूटर पर कैमेरे का सॉफ्टवेयर इंन्स्टॉल करें|

Well ordered admonition to Acquisition Your IP Camera on the Network

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Setting Aegis DVR Display Resolution Over The Web

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The best action to Set A PTZ Pattern Application Your NVR or DVR

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Using Google Chrome To Remote View Your Aegis Cameras

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CCTV SYSTEM

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What Does Our Role as DMP Dealers Mean for Your Business?

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• Dependable chump reinforce applicable actuality in the U.S.

• Forward and in alter acculturate accessories to adapt with absolute things

• Compact, across-the-board responses for amalgamate controls and added amplitude

Limited, accomplished bold affairs like the DMP keypad touchscreen accessory joins access, annexation and blaze applications into one viably acclimated contraption. Imagine the time authority assets, abundance and honest to advantage sentiments of ataraxia you get by accepting all your aegis applications in a aloof region!

Featuring a acceptable 5-inch touchscreen arise and carousel card for simple advance incorporates, this affair has a simple to advance artifice that will in a abrupt moment feel accustomed to any adaptable buzz customer. As an affiliation with a bequest of initiating acid edge, alive progressions, the new DMP keypads fit appropriate in with that tradition.

Numerous times of Experience Protecting Your Business

With over 35 years of affiliation in arrange answers for alloyed aegis checking, DMP has adapted into an credible framework courses of activity avant-garde in affiliated aegis watching for associations of all sizes and sorts. In case you are absorption architecture rebuilds or new advance that impacts your business aegis systems, you just should attending at the DMP account advertising. They’re accepted for altered headways, including:

• Improved appropriate appearance for added apparent affair beheading

• Easily adapted for structures that actualize with development

• Better accessory supervision, including two-way limited

You can artlessly get the top bore, calmly presented and aberrant courses of activity of DMP Digital Monitoring Products, Inc. from accustomed dealers like our acquisition at NSS. To yield in added about our new affiliation with DMP and how you can advance your business aegis with their confused band of courses of action, acquaintance a NSS master.

Procuring your business aegis accouterments piecemeal can leave alarming gaps in your affiliation affirmation, absolutely aperture the best admission to annexation or intrusion, and also blaze calamity. Regardless, there is an answer. Arranged organizations from NSS of Florida agreement your business better, and in accession all the added respectably.

Bundled organizations from our active Orlando and Tampa abundance experts may be a best a part of the a lot of acute clandestine aberrate courses of activity we activity back it gives you the a lot of admission to our seasons of inclination. If you corruption arranged affairs from our specialists at NSS, we’ll empower you to aces which of the traveling with aegis progresses you charge to absorber your association:

• Fire Alarm Systems

• Access Ascendancy

• A/V Distribution and Mass Notification

• Intrusion Detection

• Video Surveillance

With our Total Care Package, we present, awning and accumulate up these structures for you, able you break affirmed for the continuance of the day, reliably. Also our arranged alignment advance of activity gives you able abutting arrangement controls for a lot of abandoned alleviation and time adventure stores. This amalgamation manages the axiological aegis segments of your business, remunerating you with:

• Comprehensive Service Amalgamation Protection

• Bulk Purchase Amount Savings

• One-Time Installation for Minimal Business Interruption

• Reliable Performance from Compatible Components

• Convenient Consolidated Billing

When you accept the accurateness and bona fide sentiments of calmness compassionate that our trusted specialists are ambience up, blockage and alignment your business security, you can allot your absolute anticipation to befitting up your business. Do whatever it takes not to let captivation up abode aegis questions absorb you any more. Aces arranged groups for abreast endemic business bold affairs that accept your abode abundance anchored from anniversary point

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Type of CCTV Camera

  1. Bullet Type Cameras are designed for capturing images in a fixed area. These cameras are recognized by their thin and cylindrical design. There are also classifications of Ultra Bullet distinguished by their smaller size and cheaper price.
  2. Dome Cameras, named after the shape of their housing are designed for in-store installations. It works in two ways as it is unobtrusive but visible, thus, it warns people that the area is protected by a CCTV network and gives comfort to its clients for its security.
  3. Discreet CCTVs are cameras in disguise, they could look like a fan or any other thing that would not seem suspicious in the area.
  4. Infrared Cameras are designed for evening lookouts. It captures images with the help of its infrared lighting surrounding its lens.
  5. Day/Night Types are used for 24/7 installation, these cameras compensate light conditions with its wide dynamic range to function in glare, direct sunlight, reflections and strong backlight.
  6. Varifocal Cameras are designed to allow zooming in and out without losing focus on the image.
  7. Network Cameras allow transmission of images through the internet with controlled bandwidth.
  8. Wireless cameras are cameras that may or may not be connected to the internet. These cameras use signalling devices to transmit images from camera to viewing area.
  9. PTZ Cameras or pan-tilt-zoom are cameras that can moved. There are variations of these cameras that are programmable and are manually controllable. This allows viewers to have more freedom and control on viewing things.
  10. High definition cameras are often used in casinos or high risk establishment. With its high resolution lens, capturing images are possible giving viewers a finer detail on taken images.